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सुप्रीम कोर्ट ने वायनाड से राहुल गांधी के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को किसी के पेश ना होने पर खारिज किया 

LiveLaw News Network
2 Nov 2020 8:27 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने वायनाड से राहुल गांधी के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को किसी के पेश ना होने पर खारिज किया 
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल के वायनाड निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के 2019 के लोकसभा चुनावों में चुनौती देने वाली याचिका को डिफॉल्ट के लिए खारिज कर दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरिता एस नायर द्वारा दायर याचिका को गैर-उपस्थिति के लिए डिफ़ॉल्ट रूप से खारिज कर दिया।

जब पहली बार याचिका सुनवाई के लिए आई , तब कोई उपस्थित नहीं था। फिर पीठ ने मामले को पास ओवर कर दिया। जब बोर्ड के अंत में इस मामले को फिर से बुलाया गया, तब भी कोई उपस्थित नहीं हुआ। तब पीठ याचिका को खारिज करने के लिए आगे बढ़ी।

सरिता एस नायर द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका में उनकी चुनावी याचिका को खारिज करने के पिछले साल 31 अक्टूबर के केरल उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय को चुनौती दी गई थी।

इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी के खिलाफ सरिता की याचिका खारिज कर दी थी और चुनाव रद्द करने से इनकार कर दिया था।

याचिकाकर्ता ने वायनाड लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से अपने नामांकन को खारिज करने के रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर सवाल उठाया था। दरअसल रिटर्निंग ऑफिसर ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 (3) के अनुसार उसके नामांकन को अस्वीकार कर दिया।

इसमें कहा गया कि रिटर्निंग अधिकारी किसी उम्मीदवार के नामांकन को अस्वीकार कर सकता है यदि उसे किसी आपराधिक मामले में 2 वर्ष से अधिक की सजा हो जबकि सरिता को सौर घोटाले में दोषी ठहराया गया था और पेरुम्बवूर प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अदालत ने उसे तीन साल के कारावास और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

उच्च न्यायालय ने माना था कि सही तरीके याचिका दायर नहीं की गई थी और इसे उचित प्रारूप में सत्यापित नहीं किया गया था, क्योंकि ये लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 83 के तहत अनिवार्य है।"

हाईकोर्ट ने कहा,

... याचिकाकर्ता ने चुनाव याचिका को कानून की अनिवार्य आवश्यकताओं के अनुसार दायर नहीं किया है और अनौपचारिक रूप से कई लोगों को शामिल किए बिना एक आकस्मिक तरीके से और ठीक से उसको चिह्नित किए बिना दायर किया गया है।"

इसके अलावा, हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि सरिता एस नायर को धोखाधड़ी के लिए दो आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया गया था और इसलिए आरपी अधिनियम की धारा 8 (3) के अनुसार चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया गया था। इसलिए, उच्च न्यायालय ने माना कि उसकी चुनाव याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। वास्तव में, एर्नाकुलम और वायनाड निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने के उनके नामांकन को इसी आधार पर रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। हालांकि सरिता नायर ने कहा कि गांधी के खिलाफ अमेठी (यूपी) में चुनाव लड़ने के लिए उनके नामांकन को वहां के रिटर्निंग ऑफिसर ने स्वीकार कर लिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि वह चुनाव लड़ने से अयोग्य है।

".. चुनाव याचिका अधिनियम, 1951 की धारा 86 (1) के संदर्भ में उल्लिखित असाध्य दोषों के आधार पर खारिज कर दी जाती है, और याचिकाकर्ता को भारत के संविधान के अनुच्छेद 102 (1) (ई) के साथ पढ़ते हुए जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 8 (3) के तहत निहित अवरोधों के मद्देनज़र चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है, " उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति शाजी पी चैली की पीठ ने फैसला दिया ।

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