Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

सुप्रीम कोर्ट ने वाईएसआर कांग्रेस सांसद कृष्णम राजू का सिकंदराबाद सेना अस्पताल में चिकित्सा परीक्षण कराने का आदेश दिया

LiveLaw News Network
17 May 2021 10:53 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने वाईएसआर कांग्रेस सांसद कृष्णम राजू का सिकंदराबाद सेना अस्पताल में चिकित्सा परीक्षण कराने का आदेश दिया
x

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया कि वाईएसआर कांग्रेस के सांसद के रघुराम कृष्णम राजू, जिन्हें आंध्र प्रदेश पुलिस ने उनकी आलोचनात्मक टिप्पणी को लेकर देशद्रोह के एक मामले में गिरफ्तार किया है, को हिरासत में यातना के आरोपों के संबंध में चिकित्सा परीक्षण के लिए सेना अस्पताल, सिकंदराबाद ले जाया जाए।

जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राजू द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका में आदेश पारित किया, जिसने उनकी जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने दखल देने से इनकार करते हुए कहा था कि राजू को पहले जमानत के लिए सेशन कोर्ट जाना चाहिए।

उन्हें देशद्रोह के आरोप में शुक्रवार (14 मई) को गिरफ्तार किया गया और उन्हें गुंटूर जिले में अपराध जांच विभाग (सीआईडी) कार्यालय ले जाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल जांच का आदेश इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए पारित किया कि मजिस्ट्रेट ने उनके शरीर पर चोटों का उल्लेख किया है और पिछले साल उनकी दिल की सर्जरी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश दिए हैं:

• राजू को आज ही सिकंदराबाद के सेना अस्पताल ले जाना होगा।

• चिकित्सा परीक्षण तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा नामित न्यायिक अधिकारी की उपस्थिति में किया जाना चाहिए।

• चिकित्सा परीक्षा की वीडियोग्राफी की जानी चाहिए और सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिए।

• इलाज का खर्चा राजू को वहन करना होगा।

• वह न्यायालय के अगले आदेश तक अस्पताल में भर्ती रहेंगे और भर्ती रहने की अवधि न्यायिक हिरासत के रूप में मानी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगले शुक्रवार को विचार करेगा।

राजू की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल को वाईएसआर पार्टी का आलोचक होने के कारण निशाना बनाया गया था। रोहतगी ने अंतरिम जमानत और एक तटस्थ अस्पताल में चिकित्सा परीक्षण के लिए प्रार्थना की क्योंकि हिरासत के दौरान राजू को कथित तौर पर पीटा गया था। रोहतगी ने बताया कि पिछले साल, राजू को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बाद केंद्रीय सुरक्षा कवर हासिल करनी पड़ी क्योंकि उन्हें आंतरिक खतरों का सामना करना पड़ रहा था।

रोहतगी ने जोर देकर कहा कि राजू द्वारा दिए गए भाषणों में हिंसा के लिए कोई उकसावा या आह्वान नहीं था, और इसलिए आईपीसी की धारा 124ए के तहत राजद्रोह के अपराध को लागू करने का कोई आधार नहीं था।

रोहतगी ने कहा,

"आज सरकारें निश्चित रूप से 124ए जोड़ रही हैं, ताकि एक व्यक्ति को जमानत न मिले क्योंकि अदालतों को लगता है कि यह एक गंभीर मामला है।"

14 मई को, जो संयोगवश राजू का जन्मदिन था, पुलिस दल ने उन्हें उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया और उन्हें गुंटूर ले गई, जो कि 300 किलोमीटर दूर था। हिरासत में उसकी पिटाई की गई। मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया है कि उनके शरीर पर चोट के निशान थे, और पिछले दिसंबर में उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी। इसलिए मजिस्ट्रेट ने एक सरकारी अस्पताल और एक निजी अस्पताल द्वारा मेडिकल जांच के आदेश दिए।

रोहतगी ने आगे कहा कि उच्च न्यायालय ने राजू की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया, जिसका नेतृत्व एक स्त्री रोग विशेषज्ञ करती हैं, जिनके पति राज्य सरकार के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख हैं। उन्होंने आग्रह किया कि चिकित्सा जांच गोलकुंडा या सिकंदराबाद के सैन्य अस्पताल में की जाए।

आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने याचिका पर जवाब देने के लिए शुक्रवार तक का समय मांगा। दवे ने सुझाव दिया कि राजू की जांच आंध्र के मंगलगिरी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में की जा सकती है। चूंकि एम्स राज्य सरकार के अधीन नहीं है, रोहतगी की चिंताओं को दूर किया जाएगा, दवे ने कहा।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि परीक्षण एक न्यायिक अधिकारी की उपस्थिति में किया जा सकता है।

राजू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बी आदिनारायण राव ने भी कहा कि मंगलगिरी में एम्स अस्पताल हाल ही में शुरू हुआ है और इसलिए सुविधाओं का अभाव है। राव ने सुझाव दिया कि राजू को सिकंदराबाद के सैन्य अस्पताल में ले जाया जाए।

यह आरोप लगाया गया है कि राजू, जो आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी (उनकी अपनी पार्टी के प्रमुख) के मुखर आलोचक हैं, कुछ समुदायों के खिलाफ हेट स्पीच में लिप्त हैं और सरकार के खिलाफ असंतोष को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे सरकार में विश्वास की हानि होगी और भी गड़बड़ी पैदा होगी।

उनकी जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने कल कहा था

"इस न्यायालय के साथ-साथ सत्र न्यायालय को समवर्ती क्षेत्राधिकार है, यह न्यायालय इस याचिका को ट्रायल जज के समक्ष पेश किए बिना सीधे इस याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है, जहां रिमांड रिपोर्ट सहित पूरी सामग्री उनके पेश होने पर उपलब्ध होगी।"

ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



Next Story