NEET-PG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों को वास्तविक प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर उपलब्ध कराने की मांग पर जारी किया नोटिस

  • NEET-PG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों को वास्तविक प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर उपलब्ध कराने की मांग पर जारी किया नोटिस

    सुप्रीम कोर्ट ने NEET-PG 2026 की उत्तर कुंजी और उम्मीदवारों के जवाबों के खुलासे के तरीके को चुनौती देने वाली याचिका पर 15 अक्टूबर को नोटिस जारी किया।

    याचिका में मांग की गई है कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) प्रत्येक उम्मीदवार को परीक्षा में वास्तव में पूछे गए प्रश्न, विकल्पों का पूरा विवरण, उम्मीदवार के दर्ज जवाब और अंतिम उत्तर कुंजी के अनुसार सही उत्तर उपलब्ध कराए, ताकि वह अपने अंकों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कर सके।

    जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए इसे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) से जुड़े व्यापक मुद्दों पर लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न किया।

    NEET-PG 2026 की परीक्षा 30 अगस्त को आयोजित हुई और परिणाम 24 सितंबर को घोषित किए गए।

    याचिका में NBEMS के 1 अक्टूबर के उस सार्वजनिक नोटिस को चुनौती दी गई, जिसके तहत उम्मीदवार अपने व्यक्तिगत लॉगिन के माध्यम से प्रत्येक प्रश्न का मूल्यांकन देख सकते हैं।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि इस व्यवस्था में प्रश्नों की पहचान संख्या, सही उत्तर के विकल्प की संख्यात्मक पहचान, उम्मीदवार द्वारा चुना गया जवाब और प्रत्येक प्रश्न के लिए दिए गए अंक तो बताए जाते हैं, लेकिन वास्तविक प्रश्न और विकल्पों का पूरा पाठ उपलब्ध नहीं कराया जाता।

    याचिका के मुताबिक इस जानकारी से उम्मीदवार यह स्वतंत्र रूप से जांच नहीं कर सकते कि जिस प्रश्न का उन्होंने उत्तर दिया था, उसी के लिए सही उत्तर कुंजी लागू की गई या नहीं। इसी तरह यह सत्यापित करना भी संभव नहीं है कि उम्मीदवार का दर्ज जवाब संबंधित प्रश्न और विकल्पों के साथ सही ढंग से जोड़ा गया या नहीं।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि उम्मीदवारों ने वास्तविक प्रश्नपत्र, आधिकारिक उत्तर कुंजी और अपने दर्ज जवाबों की मांग की थी न कि केवल संख्यात्मक पहचान की।

    इसके बावजूद कई शिकायतों के जवाब में NBEMS ने मानक प्रारूप में कहा कि घोषित परिणाम तथ्यात्मक और सही हैं। याचिका के अनुसार बोर्ड ने उम्मीदवारों को 24 सितंबर के सार्वजनिक नोटिस के बिंदु संख्या 9 का हवाला दिया।

    याचिका में यह भी कहा गया कि NBEMS प्रत्येक उम्मीदवार के लिए प्रश्नों का क्रम और विकल्पों का क्रम अलग-अलग रखता है। ऐसे में केवल यह बताना कि किसी प्रश्न के लिए एक निश्चित संख्या वाला विकल्प सही था और उम्मीदवार ने दूसरी संख्या वाला विकल्प चुना, पर्याप्त नहीं है। वास्तविक प्रश्न और विकल्पों का पाठ उपलब्ध न होने से उम्मीदवार यह नहीं जान सकते कि उनके परीक्षा रिकॉर्ड में प्रश्नों और विकल्पों का सही मिलान किया गया है या नहीं।

    याचिकाकर्ता के अनुसार मौजूदा व्यवस्था अधिकतम दिए गए अंकों का गणितीय मिलान करने की सुविधा देती है, लेकिन उत्तर कुंजी की विषयवस्तु और उम्मीदवार-विशेष प्रश्नों तथा विकल्पों के मिलान का स्वतंत्र सत्यापन नहीं होने देती। वास्तविक प्रश्नों और विकल्पों तक पहुंच के अभाव में उम्मीदवार अस्पष्ट प्रश्नों, एक से अधिक सही उत्तर वाले सवालों आधिकारिक उत्तर कुंजी की संभावित गलतियों या प्रश्नों और दर्ज जवाबों के मिलान में हुई गड़बड़ियों को प्रभावी ढंग से सामने नहीं ला सकते।

    याचिका में सुप्रीम कोर्ट से निर्देश देने की मांग की गई कि NBEMS प्रत्येक उम्मीदवार को उसके वास्तविक परीक्षा रिकॉर्ड के अनुरूप प्रश्नपत्र और उत्तर-पत्र उपलब्ध कराए। इसमें परीक्षा के दौरान प्रस्तुत क्रम में वास्तविक प्रश्न, उसी उम्मीदवार के लिए इस्तेमाल किए गए क्रम में सभी विकल्प, दर्ज जवाब, अंतिम आधिकारिक उत्तर कुंजी के अनुसार सही उत्तर और प्रत्येक प्रश्न के लिए दिए गए अंक शामिल हों।

    इसके अलावा याचिकाकर्ता ने इन रिकॉर्ड की PDF, CSV या किसी अन्य उपयुक्त प्रारूप में डाउनलोड की जा सकने वाली स्थायी इलेक्ट्रॉनिक प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। उम्मीदवारों को वास्तविक प्रश्न और विकल्प देखने के बाद निर्धारित समयसीमा में आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर देने की भी मांग की गई।

    याचिका में विषय विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने की मांग भी की गई, जो उम्मीदवारों की आपत्तियों पर विचार करे। उम्मीदवारों को जरूरत पड़ने पर अपने दावों के समर्थन में प्रामाणिक चिकित्सा संबंधी सामग्री प्रस्तुत करने की अनुमति देने और गलती साबित होने पर अंकों तथा रैंक में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया।

    याचिकाकर्ता ने भविष्य में होने वाली स्नातकोत्तर चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं के लिए परीक्षा के बाद जानकारी सार्वजनिक करने की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के वास्ते दिशानिर्देश या मानक संचालन प्रक्रिया बनाने की मांग भी की।

    इस मामले में याचिका ने उपेंद्र यादव बनाम नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज का भी हवाला दिया है। उस मामले में NEET-PG 2025 के मास्टर सेट के संदर्भ में प्रश्नों की पहचान संख्या, उत्तर कुंजी और उम्मीदवारों के जवाबों के खुलासे की प्रक्रिया को चुनौती दी गई।

    याचिका के अनुसार, लगातार परीक्षाओं में सामने आए इन मुद्दों से स्पष्ट होता है कि परीक्षा के बाद उम्मीदवारों को उनके प्रदर्शन का स्पष्ट और सत्यापन योग्य रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की जरूरत है।

    याचिका में मामले की तात्कालिकता पर भी जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि NEET-PG 2026 के घोषित अंक और रैंक ही काउंसलिंग तथा प्रवेश प्रक्रिया का आधार बनेंगे। यदि उम्मीदवारों को अपने अंकों की जांच करने और स्पष्ट गलतियों में सुधार मांगने का प्रभावी अवसर देने में देरी हुई, तो काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है और संभावित त्रुटियों को समय रहते ठीक करना मुश्किल हो सकता है।

    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से NBEMS के 1 अक्टूबर के नोटिस को उस सीमा तक रद्द करने का अनुरोध किया है जहां वह वास्तविक प्रश्नों और उम्मीदवार-विशेष विकल्पों का पाठ दिए बिना केवल प्रश्नों की पहचान संख्या, सही उत्तर की संख्यात्मक पहचान, उम्मीदवार के संख्यात्मक जवाब और प्रश्नवार अंक उपलब्ध कराने तक खुलासे को सीमित करता है। साथ ही, बोर्ड को निर्देश देने की मांग की गई कि वह प्रत्येक उम्मीदवार का पूरा परीक्षा रिकॉर्ड उसके व्यक्तिगत लॉगिन पर उपलब्ध कराए।

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