भगवंत मान समेत AAP नेताओं को राहत देने वाले फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा चंडीगढ़ प्रशासन
Amir Ahmad
22 May 2026 1:55 PM IST

चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ दर्ज दंगा मामला रद्द कर दिया गया।
यह मामला वर्ष 2020 में चंडीगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़ा है।
शुक्रवार को यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ। हालांकि केंद्र सरकार ने अन्य आरोपियों से जुड़े मामलों में भी याचिकाएं दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि AAP नेताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता और भारतीय दंड संहिता (IPC) की जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, उनके समर्थन में पर्याप्त सामग्री मौजूद नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाने और हमला करने से संबंधित धाराओं में दर्ज FIR और आरोपपत्र रद्द कर दिया था।
अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं द्वारा कथित उकसावे की प्रकृति का कहीं उल्लेख नहीं है और न ही उनके किसी विशेष शब्द या इशारे का जिक्र किया गया। इसलिए भीड़ द्वारा पत्थरबाजी की घटना को सीधे तौर पर उनसे जोड़ने का आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने यह भी पाया था कि प्रदर्शन के समय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू नहीं थी, इसलिए उस जमावड़े को गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि आरोपपत्र में खुद यह स्वीकार किया गया कि 750 से 800 लोगों की पहचान अब तक नहीं हो सकी थी और पूरक चालान दाखिल किया जाना बाकी था।
मामले की पृष्ठभूमि में वर्ष 2020 में दर्ज वह FIR है, जिसमें आरोप लगाया गया कि AAP के सीनियर नेताओं ने बिजली दरों में वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री के आवास की ओर मार्च करने के लिए उकसाया। पुलिस के अनुसार, बैरिकेडिंग के पास भीड़ आक्रामक हो गई और पानी की बौछार किए जाने के बाद पत्थरबाजी शुरू हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई थीं।

