गुरुग्राम मासूम दुष्कर्म मामला: मैक्स अस्पताल की डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई, कहा- "मैंने अपनी राय नहीं बदली"

Amir Ahmad

8 April 2026 11:51 AM IST

  • गुरुग्राम मासूम दुष्कर्म मामला: मैक्स अस्पताल की डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई, कहा- मैंने अपनी राय नहीं बदली

    गुरुग्राम में 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में एक नया मोड़ आया। मैक्स अस्पताल की डॉक्टर बबिता जैन, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था, उन्होंने अपना जवाब दाखिल किया। डॉक्टर ने कोर्ट के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने बच्ची की स्थिति को लेकर अपनी मेडिकल राय में कोई बदलाव नहीं किया।

    मैक्स हेल्थकेयर में बाल रोग विभाग की प्रमुख डॉ. बबिता जैन ने अपने हलफनामे में उन आरोपों को गलत बताया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने किसी दबाव में आकर अपनी रिपोर्ट बदली।

    उन्होंने कहा,

    "मैंने किसी भी तरह से अपनी मेडिकल राय नहीं बदली है। इस संबंध में किसी भी पक्ष द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह गलत है।"

    इससे पहले की सुनवाई में पीड़ित पक्ष के वकील मुकुल रोहतगी ने आरोप लगाया था कि डॉक्टर ने शुरुआती जांच के डेढ़ महीने बाद अपनी राय पूरी तरह बदल ली। उन्होंने सवाल उठाया था कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो डॉक्टर ने डेढ़ महीने बाद पुलिस को एक पत्र लिखकर अलग बातें कहीं।

    इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्याकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए इसे "एक डॉक्टर के लिए शर्मनाक" बताया था और उनसे स्पष्टीकरण मांगा था।

    डॉक्टर जैन ने कोर्ट को बताया कि 2 फरवरी को बच्ची के माता-पिता उसे अस्पताल लाए थे। डॉक्टर ने बच्ची की मां से बात की और फिर बच्ची से पूछताछ कर केस शीट तैयार की। बच्ची ने बताया कि काम वाली बाई उसे ऑटो में एक "गंदी जगह" ले गई, जहां एक आदमी ने उसके गाल चूमे, कान मरोड़े और पेट पर हाथ मारा।

    डॉक्टर ने हलफनामे में विस्तार से बताया,

    शारीरिक जांच के दौरान बच्ची के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं थे और निजी अंग सामान्य पाए गए।

    डॉक्टर ने ही बच्ची के माता-पिता को पुलिस को सूचित करने और एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) कराने की सलाह दी थी।

    इसके 5 दिन बाद एक महिला पुलिस अधिकारी अस्पताल आईं और डॉक्टर की केस शीट के आधार पर बयान दर्ज किया, जिस पर डॉक्टर ने हस्ताक्षर किए।

    फिर घटना के 47 दिन बाद दो पुलिस अधिकारी दोबारा आए और जानकारी मांगी। डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने अपनी याददाश्त के आधार पर वही बातें दोहराईं जो पहले लिखी थीं।

    गौरतलब है कि पीड़ित बच्ची के माता-पिता ने हरियाणा पुलिस की जांच पर असंतोष जताते हुए CBI या SIT जांच की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट पहले ही हरियाणा पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जता चुका है। कोर्ट ने पुलिस की जांच को "चौंकाने वाला" और संवेदनहीन बताया था।

    अदालत ने इस मामले की जांच के लिए अब एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर सहित संबंधित अधिकारियों को जांच से हटा दिया। कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई थी कि पुलिस ने FIR में गंभीर धाराओं के बजाय कमज़ोर धाराएं क्यों लगाई थीं?

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