बिना वजह मामलों का मेंशन न करें, वरना सूचीबद्ध नहीं करूंगा: CJI सूर्यकांत की वकीलों को सख्त चेतावनी
Amir Ahmad
10 March 2026 3:11 PM IST

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मंगलवार को वकीलों द्वारा बार-बार मामलों को सूचीबद्ध कराने के लिए मौखिक उल्लेख (मेंशन) करने की प्रथा पर नाराज़गी जताई।
उन्होंने साफ कहा कि अब मामलों की सूचीबद्धता के लिए स्वचालित व्यवस्था लागू हो चुकी है, इसलिए रोज सुबह अदालत में आकर मेंशन करने की आवश्यकता नहीं है।
अदालत में कई वकीलों को मामलों का उल्लेख करने के लिए कतार में खड़ा देख चीफ जस्टिस ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे गलत संदेश जाता है कि बिना मेंशन किए मामला सूचीबद्ध नहीं होगा।
CJI ने कहा,
“आप सब अच्छी तरह जानते हैं कि मामले सूचीबद्ध हो जाएंगे। फिर अनावश्यक मेंशन क्यों किया जा रहा है। इससे मुवक्किलों को यह गलत धारणा दी जाती है कि बिना मेंशन किए मामला सूची में नहीं आएगा। इस धारणा को मैं खत्म कर दूंगा।”
चीफ जस्टिस ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वकील अनावश्यक रूप से मेंशन करते रहे तो ऐसे मामलों को सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा,
“मैं और टिप्पणी करने से खुद को रोक रहा हूं। आप जानते हैं कि यदि फाइलिंग की त्रुटियां दूर कर दी जाती हैं तो मामला सूचीबद्ध हो जाएगा लेकिन फिर भी आप मेंशन करते हैं कारण सबको पता है।”
दरअसल चीफ जस्टिस बनने के बाद नवंबर 2025 में जस्टिस सूर्यकांत ने एक परिपत्र जारी किया, जिसमें कहा गया कि फाइलिंग की कमियां दूर होने के बाद मामलों को दो दिनों के भीतर स्वतः सूचीबद्ध कर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य अदालत में मेंशन की परंपरा को खत्म करना था।
हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट की कार्यसूची में भी एक नोट जारी कर वकीलों को इस नई व्यवस्था की जानकारी दी गई।
इसमें बताया गया कि जमानत, मृत्यु दंड, बंदी प्रत्यक्षीकरण, बेदखली, ध्वस्तीकरण और अन्य अत्यावश्यक अंतरिम राहत से जुड़े मामलों को फाइलिंग की जांच और त्रुटियों के सुधार के बाद दो कार्यदिवस के भीतर सूचीबद्ध किया जाएगा।
अन्य नए मामलों को फाइलिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले सोमवार या शुक्रवार को सूचीबद्ध किया जाएगा।
नोट में स्पष्ट किया गया कि सूचीबद्धता की प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित है। इसके लिए वकीलों को अदालत के समक्ष मेंशन करने की आवश्यकता नहीं है।

