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बाबरी विध्वंस साजिश : UP सरकार ने विशेष जज का कार्यकाल बढ़ाने का नोटिफिकेशन जारी किया, सुरक्षा भी दी, SC ने अर्जी का निस्तारण किया

LiveLaw News Network
13 Sep 2019 9:21 AM GMT
बाबरी विध्वंस साजिश : UP सरकार ने विशेष जज का कार्यकाल बढ़ाने का नोटिफिकेशन जारी किया, सुरक्षा भी दी, SC ने अर्जी का निस्तारण किया
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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की साजिश की सुनवाई कर रहे लखनऊ की सीबीआई कोर्ट के विशेष जज एस के यादव का कार्यकाल बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने जज को सुरक्षा दी है और अदालत व उनके सरकारी आवास पर संसाधनों की व्यवस्था भी की है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई बंद करते हुए केस का निपटारा कर दिया है।

शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस आरएफ नरीमन की पीठ को जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के जुलाई के आदेश के मुताबिक विशेष जज का कार्यकाल बढ़ाने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। साथ ही उन्हें सुरक्षा भी दे दी गई है। उन्हें सरकारी आवास भी दिया गया है और कोर्ट व आवास पर संसाधनों की व्यवस्था की गई है। पीठ ने इस पर संतोष जताते हुए केस का निपटारा कर दिया।

गौरतलब है कि 19 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के दिग्गज नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, एमएम जोशी, उमा भारती और अन्य के खिलाफ बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की साजिश की सुनवाई कर रहे लखनऊ की सीबीआई कोर्ट के विशेष जज को निर्देश दिया था कि वो नौ महीने में ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाएं। इसके साथ ही पीठ ने 30 सितंबर को रिटायर हो रहे सीबीआई जज एसके यादव के कार्यकाल को भी ट्रायल पूरा होने तक बढ़ाने का आदेश जारी किया था।

फैसला सुनाते हुए जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया था कि जज 6 महीने में सुनवाई पूरी करेंगे। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वो हाईकोर्ट से परामर्श कर जज के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए नोटिफिकेशन जारी करे।

गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई को अर्जी पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि किस तरह विशेष जज का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है ताकि वो छह महीने में ट्रायल पूरा कर सकें।

दरअसल विशेष जज एसके यादव ने मई में लिखे एक पत्र में शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि वह 30 सितंबर, 2019 को सेवानिवृत हो रहे हैं जबकि इस ट्रायल को पूरा होने में अभी 6 महीने लगेंगे।

पीठ ने कहा था कि ये हाई प्रोफाइल मामला है और इस ट्रायल को उसी जज द्वारा पूरा किया जाना चाहिए। पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ऐश्वर्या भाटी को कहा था कि वो किस तरह विशेष जज का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए कोई कानूनी प्रावधान हो तो वो भी बताया जाए।

गौरतलब है कि 19 अप्रैल, 2017 को जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस आरएफ नरीमन की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर अपील की अनुमति देकर आडवाणी, जोशी, उमा भारती और 13 अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोपों को बहाल किया था।संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए पीठ ने रायबरेली की एक मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित अलग मुकदमे को भी स्थानांतरित कर दिया और इसे लखनऊ सीबीआई कोर्ट में आपराधिक कार्यवाही के साथ जोड़ दिया। शीर्ष अदालत ने मामले में दो साल में दिन-प्रतिदिन सुनवाई कर ट्रायल को समाप्त करने का आदेश दिया था और कहा था कि विशेष जज का ट्रांसफर नहीं होगा। पीठ ने कहा था कि एक आरोपी कल्याण सिंह को राजस्थान के राज्यपाल होने के नाते संवैधानिक प्रतिरक्षा प्राप्त है लेकिन जैसे ही वह पद त्यागते हैं तो उनके खिलाफ अतिरिक्त आरोप दायर किए जाएंगे।

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