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लखीमपुर खीरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से आशीष मिश्रा के खिलाफ आरोप तय करने को कहा

Sharafat
25 Nov 2022 12:50 PM GMT
लखीमपुर खीरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से आशीष मिश्रा के खिलाफ आरोप तय करने को कहा
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को लखीमपुर खीरी में किसान हत्याकांड के सिलसिले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट से आरोप तय करने के लिए मामला तय करने को कहा।

यह अपराध 3 अक्टूबर, 2021 को हुआ था, जब कई किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की लखीमपुर खीरी जिले की यात्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और कथित रूप से आशीष मिश्रा के काफिले की एक एसयूवी द्वारा कुचले जाने के बाद चार प्रदर्शनकारी किसानों की मौत हो गई थी।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच को आज बताया गया कि हालांकि चार्जशीट पहले ही जमा कर दी गई है, लेकिन ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने के संबंध में उचित आदेश पारित करना बाकी है। यह देखते हुए कि मामला 29 नवंबर को ट्रायल कोर्ट के सामने आएगा, अदालत ने ट्रायल कोर्ट एक सप्ताह के भीतर आरोप तय करने को कहा।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि मिश्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर सुने-सुनाए गवाहों पर आधारित है न कि चश्मदीदों गवाहों की गवाही पर।

जस्टिस नाथ ने पूछा, "इससे कैसे फर्क पड़ता है?"

मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होगी।

पहले की सुनवाई में सीनियर एडवोकेट रंजीत कुमार मिश्रा की ओर से पेश हुए थे। उन्होंने प्रस्तुत किया था कि मिश्रा 11 महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं। उन्होंने कहा कि मामले में जनवरी 2022 में चार्जशीट दायर की जा चुकी है। मिश्रा अपराध स्थल पर नहीं थे और सीसीटीवी रिकॉर्ड हैं जो बताते हैं कि वह 4 किमी की दूरी पर कहीं और थे जहां कुश्ती मैच हो रहा था।

उन्होंने आगे कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने वाहनों के काफिले पर हमला किया और मौत तब हुई जब चालक के नियंत्रण खो देने के बाद वाहन प्रदर्शनकारियों पर चढ़ गया। उन्होंने अभियोजन पक्ष की इस बात का खंडन किया कि मिश्रा ने क्रोधित होने के बाद प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी और दावा किया कि शवों में फायर आर्म से कोई चोट नहीं पाई गई।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को मिश्रा को जमानत दे दी थी, लेकिन अप्रैल 2022 में तत्कालीन सीजेआई एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हेमा कोहली की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद जमानत अर्जी हाईकोर्ट में भेज दी गई। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अपराध में मारे गए किसानों के परिजनों की अपील पर आया।

केस टाइटल : आशीष मिश्रा बनाम यूपी राज्य | एसएलपी (सीआरएल) नंबर 7857/2022

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