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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को COVID-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों के कल्याण के लिए 25 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए एक ठोस योजना प्रस्तुत करने को कहा

LiveLaw News Network
14 Sep 2021 2:45 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को COVID-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों के कल्याण के लिए 25 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए एक ठोस योजना प्रस्तुत करने को कहा
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बाल और कल्याण विभाग, महाराष्ट्र राज्य को COVID-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों के कल्याण के लिए 25 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए एक ठोस योजना प्रस्तुत करने को कहा।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्न की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि COVID-19 महामारी के कारण लगभग 19,000 बच्चों ने कम से कम अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया और यह अनुमान लगाया गया कि महामारी के कारण 593 बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है।

कोर्ट ने बाल एवं कल्याण विभाग को 3 सप्ताह के भीतर योजना प्रस्तुत करते हुए अपना जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।

महाराष्ट्र राज्य की ओर से पेश हुए, अधिवक्ता सचिन पाटिल ने 17 जून, 2021 की राज्य की नीति के बारे में शीर्ष न्यायालय को अवगत कराया, जिसके द्वारा राज्य ने प्रति बच्चे को सावधि जमा के रूप में 5 लाख रुपये रखने का फैसला किया है, जिसने माता-पिता दोनों को खो दिया है। इस योजना के तहत जब ये बच्चे वयस्क की आयु प्राप्त कर लेंगे तब इन बच्चों को इस पैसे का भुगतान किया जाएगा।

यह भी तर्क दिया कि बाल स्वराज योजना के तहत 593 बच्चों का विवरण एनसीपीसीआर पोर्टल पर अपलोड किया गया है।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 20 करोड़ रुपये की राशि जो ब्याज की राशि के परिणामस्वरूप 16 दिसंबर के आदेश के अनुसार जमा की गई थी, अब 25 करोड़ हो गई है।

पृष्ठभूमि

निर्देश तब जारी किए गए, जब बेंच बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका के संबंध में निर्देशों के लिए एक विविध आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसे 16 दिसंबर, 2016 को निपटाया गया था।

शीर्ष न्यायालय ने अपने आदेश में महाराष्ट्र राज्य को प्रतिवादियों (जिन्होंने हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट शेखर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन में छात्रों को अपने कॉलेज में भर्ती कराया था) से वसूलने के बाद रजिस्ट्री में 20 करोड़ रुपये जमा करने के लि निर्देश दिया था।

अदालत ने दिसंबर, 2016 के आदेश में भी कहा था कि इसका उपयोग जुवेनाइल जस्टिस के मुद्दों के लिए किया जाना चाहिए।

केस का शीर्षक: दानाने श्वेता सुनील एंड अन्य बनाम भारत संघ

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