छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी 116 FIR रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं चार राज्य सरकारें, केंद्र के आश्वासन का दिया हवाला

Amir Ahmad

1 Sept 2026 1:36 PM IST

  • छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी 116 FIR रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं चार राज्य सरकारें, केंद्र के आश्वासन का दिया हवाला

    बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम सरकारों ने जुलाई में NEET परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी 116 FIR रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार की ओर से 25 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी को दिए गए उस आश्वासन का हवाला दिया, जिसके अनुसार आंदोलन वापस लेने की स्थिति में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाने थे।

    चारों राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए FIR रद्द करने का आग्रह किया।

    इससे एक दिन पहले केंद्र सरकार ने भी दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया। केंद्र ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों के खिलाफ एक अलग FIR दर्ज करने की अनुमति भी मांगी।

    इन आवेदनों का महत्व इसलिए बढ़ गया, क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को दिल्ली में फिर प्रदर्शन करने का ऐलान किया। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को किए गए अपने वादे के अनुसार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए हैं।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार सुबह चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) से अनुरोध किया कि राज्यों के आवेदन और केंद्र के आवेदन पर दोपहर 2 बजे एक साथ सुनवाई की जाए।

    बिहार सरकार ने 69 FIR रद्द करने की मांग की। ये मामले राज्य के कई जिलों के अलग-अलग थानों में दर्ज किए गए। इनमें 20 जुलाई से 27 जुलाई 2026 के बीच दर्ज FIR शामिल हैं। पटना के गांधी मैदान और कोतवाली थाने के अलावा गोपालगंज टाउन, सीवान टाउन, जहानाबाद, कटिहार टाउन, मुजफ्फरपुर टाउन, बिहार शरीफ समेत कई स्थानों के मामले सूची में हैं।

    महाराष्ट्र सरकार ने 34 FIR रद्द करने की मांग की। इनमें नागपुर, मुंबई, पुणे, जलगांव, बुलढाणा और अमरावती समेत कई स्थानों पर दर्ज मामले शामिल हैं। शिवाजी पार्क और सीताबुलडी थानों के कई मामले भी सूची में हैं। इसके अलावा गणेश पेठ, सादर, आजाद मैदान, चेंबूर, वाडी, बुलढाणा, डेक्कन, अंबी और रामटेक थानों में दर्ज प्राथमिकी भी शामिल हैं।

    महाराष्ट्र सरकार ने अपने आवेदन में कहा कि 25 जुलाई के केंद्र सरकार के फैसले के बाद वह सूचीबद्ध प्राथमिकी को आगे चलाने या उनकी जांच जारी रखने की इच्छुक नहीं है।

    पश्चिम बंगाल ने आठ FIR रद्द करने की मांग की। इनमें एक मामला एंटाली थाने और सात मामले हेयर स्ट्रीट थाने में दर्ज हैं।

    राज्य सरकार ने यह भी कहा कि यदि बाद में इन्हीं घटनाओं से संबंधित कोई अन्य FIR उसके संज्ञान में आती है तो वह संबंधित व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट से इसी तरह की राहत मांगने का विरोध नहीं करेगी। पश्चिम बंगाल ने यह आश्वासन भी दिया है कि आवेदन में शामिल घटनाओं को लेकर कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

    असम सरकार ने पांच FIR रद्द करने के लिए आवेदन दिया। अन्य राज्यों की तरह असम ने भी कहा कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले के बाद वह इन FIR को आगे चलाने या उनकी जांच करने की इच्छुक नहीं है।

    चारों राज्यों के आवेदनों में केंद्र सरकार के 25 जुलाई के आश्वासन को आधार बनाया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा है कि क्या अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इन FIR को रद्द किया जाए।

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