छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी केंद्र सरकार, अनुच्छेद 142 के तहत मांगी जाएगी राहत
Amir Ahmad
31 Aug 2026 8:01 PM IST

छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कराने के लिए केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों को रद्द करने की मांग करेगी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले का मौखिक रूप से उल्लेख किया। अदालत की कार्यवाही समाप्त होने वाली थी तभी उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के सामने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए उठाया और मंगलवार को सुनवाई की मांग की।
चीफ जस्टिस ने पूछा कि आवेदन किस मामले से संबंधित है।
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा,
"यह उस प्रदर्शन से जुड़ा मामला है, FIR रद्द कराने के लिए हम अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रहे हैं।"
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,
"ठीक है, आप आवेदन दाखिल कीजिए। अगर पक्षकार आपस में सहमति बना रहे हैं... तो हमें कोई परेशानी नहीं है।"
केंद्र सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च को लेकर मामला फिर गरमाता दिख रहा है। कॉकरेच जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र ने जुलाई में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का अपना आश्वासन पूरा नहीं किया।
छात्र आंदोलन खत्म करने के लिए 25 जुलाई को रखी गई शर्तों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना भी शामिल था। अब केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर एफआईआर रद्द करने की मांग किए जाने की तैयारी है।
इससे पहले 18 अगस्त को छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि FIR दर्ज होने के बाद उन्हें वापस लेने में कानूनी अड़चन है। एक बार FIR दर्ज होने के बाद पुलिस उसे केवल अंतिम रिपोर्ट के जरिये बंद करने की प्रक्रिया अपना सकती है और संबंधित मजिस्ट्रेट के पास उस रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार होता है।
पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने बताया था कि करीब 2873 लोगों को छोड़कर अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द किया जा सकता है। इन 2873 लोगों पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामले होने की बात कही गई थी।
सॉलिसिटर जनरल ने उस समय कहा था कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR रद्द की जानी चाहिए, जबकि प्रदर्शन में शामिल हुए असामाजिक तत्वों के खिलाफ जांच जारी रहनी चाहिए।
अब केंद्र सरकार अपने आवेदन के जरिये सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत हस्तक्षेप कर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग करने जा रही है। मामले की तत्काल सुनवाई मंगलवार को होने की संभावना है।


