सोनम वांगचुक के समर्थन वाले SCBA प्रस्ताव में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाएं

Amir Ahmad

5 Aug 2026 3:13 PM IST

  • सोनम वांगचुक के समर्थन वाले SCBA प्रस्ताव में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाएं

    सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की कार्यकारिणी समिति द्वारा सोनम वांगचुक के आमरण अनशन के समर्थन में पारित प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

    अदालत ने कहा कि यदि बार एसोसिएशन के विचारों में न्यायालय हस्तक्षेप करेगा तो यह एक खतरनाक मिसाल होगी।

    हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को SCBA के नियमों के तहत उपलब्ध लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है तो याचिकाकर्ता निर्वाचन समिति का रुख कर सकता है।

    मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने की।

    याचिकाकर्ता आशीष गोपाल गर्ग ने दलील दी कि SCBA की कार्यकारिणी समिति ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर छात्र आंदोलनों के समर्थन में सोनम वांगचुक के अनशन के पक्ष में एक राजनीतिक रूप से विवादित प्रस्ताव पारित किया। इससे यह संदेश गया कि यह पूरे बार एसोसिएशन की राय है, जबकि ऐसा नहीं था।

    याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि नए चुनाव की घोषणा के बाद कार्यकारिणी समिति अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी थी, इसलिए उसे ऐसा प्रस्ताव पारित करने का अधिकार नहीं था।

    इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह बार एसोसिएशन का आंतरिक मामला है।

    उन्होंने कहा,

    अलोकतांत्रिक निर्णय और अवैध निर्णय में अंतर होता है। यदि आपको लगता है कि यह अलोकतांत्रिक निर्णय है तो आपका उपाय आम सभा बुलाने की मांग करना है। यदि आम सभा नहीं बुलाई जाती, तब आप अदालत आ सकते हैं।"

    याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनाव होने वाले हैं और इस प्रस्ताव का जवाब केवल नई कार्यकारिणी ही दे सकती है, इसलिए मौजूदा कार्यकारिणी को ही इसे वापस लेने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

    इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिका के साथ संलग्न दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए कहा कि 37 सदस्य पहले ही इस प्रस्ताव का विरोध कर चुके हैं।

    उन्होंने कहा,

    "आप आवश्यक संख्या में सदस्यों के हस्ताक्षर जुटाइए और आम सभा बुलाने की प्रक्रिया अपनाइए। यही लोकतांत्रिक तरीका है। अपने मतभेद एसोसिएशन के भीतर ही सुलझाइए।"

    जब याचिकाकर्ता ने भविष्य में कार्यकारिणी समिति को ऐसे प्रस्ताव पारित करने से रोकने की मांग की, तब जस्टिस बागची ने कहा कि ऐसा करना बार एसोसिएशन की लोकतांत्रिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप होगा और यह एक खतरनाक मिसाल बनेगी।

    उन्होंने कहा,

    "सिर्फ इसलिए कि आपको कोई प्रस्ताव पसंद नहीं है यदि हम हस्तक्षेप करेंगे तो यह बार एसोसिएशन के लोकतांत्रिक चरित्र पर गलत प्रभाव डालेगा। बार की अपनी स्वतंत्रता है और हम उसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे।"

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि कुछ लोगों की व्यक्तिगत राय पूरे बार एसोसिएशन की राय के रूप में प्रस्तुत नहीं की जा सकती।

    इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की,

    "कृपया 'हम' शब्द का प्रयोग न करें, क्योंकि आप भी पूरे बार का प्रतिनिधित्व नहीं करते।"

    याचिकाकर्ता ने उस प्रस्ताव की भाषा पर भी आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया कि सोनम वांगचुक के अनशन पर "संस्थागत अंतरात्मा ने अपेक्षित संवेदनशीलता और तत्परता नहीं दिखाई।"

    उन्होंने अदालत से आम सभा बुलाने का निर्देश देने का अनुरोध किया, लेकिन पीठ ने ऐसा करने से साफ इनकार किया।

    अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस याचिका पर विचार करने का इच्छुक नहीं है। हालांकि, याचिकाकर्ता को SCBA के नियमों के तहत उपलब्ध लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, जिसमें निर्वाचन समिति का रुख करना भी शामिल है, अपनाने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका का निस्तारण किया।

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