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"समाज का सामूहिक विवेक दहशत से भर उठा"; बाम्बे हाइकोर्ट का फैसला, हत्या के मामले में 5 दोषियों की फांसी बरकरार, एक बरी

LiveLaw News Network
3 Dec 2019 2:36 PM GMT
समाज का सामूहिक विवेक दहशत से भर उठा; बाम्बे हाइकोर्ट का फैसला, हत्या के मामले में 5 दोषियों की फांसी बरकरार, एक बरी
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मृतक सचिन जो अनुसूचित जाति के थे, उन्हें सीमा दरंदले से प्यार हो गया, जो मराठा जाति की हैं।

बाम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को संदीप थंवर, राहुल कंडारे और सचिन घारू की 2013 में हुई हत्या के दोषी पांच लोगों को मौत की सजा की पुष्टि कर दी। अभियुक्तों में से एक अशोक नवगीरे को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया।

जस्टिस बीपी धर्माधिकारी और जस्टिस एसके शिंदे की खंडपीठ ने पुष्टि के मामले की सुनवाई की और 133 पृष्ठों का निर्णय सुनाया। कोर्ट ने कहा-

"हम जानते हैं कि अभियुक्तों को कठोर अपराधी नहीं माना सकता है, लेकिन जिस क्रूर तरीके से उन्होंने अपराध किया है और विशेष रूप से सचिन के कटे हुए शव और सचिन और राहुल के शवों को गायब करने के उनके सामूहिक प्रयासों ने समाज के सामूहिक विवेक को भयभीत कर दिया। वर्तमान मामला स्पष्ट रूप से "दुर्लभतम और दुर्लभ मामलों" की श्रेणी में आता है और इसलिए हम मानते हैं कि किसी भी अन्य सजा का प्रश्न निर्विवाद रूप से समाप्त हो जाता है।

केस की पृष्ठभूमि

मामले में तीनों मृतक अहमदनगर जिले के त्रिमूर्ति प्रतिष्ठान कॉलेज में स्वीपर के रूप में काम करते थे। सचिन जो अनुसूचित जाति के थे, उन्हें सीमा दरंदले से प्यार हो गया, जो मराठा जाति (उच्च वर्ग) की हैं। सीमा आरोपी नंबर-5 पोपट दरंदले की बेटी है। वह त्रिमूर्ति कॉलेज में बीएड कोर्स कर रही थी। जब परिवार के सदस्यों को सीमा के सचिन के साथ कथित प्रेम संबंधों का पता चला, रमेश दरंदले (आरोपी नंबर एक), प्रकाश दरंदले (आरोपी नंबर दो), दोनों सीमा के मामा हैं, संदीप कुरे (आरोपी नंबर तीन और सीमा के रिश्तेदार), अशोक नवगिरे (आरोपी नंबर चार), रमेश दरंदले, (आरोपी नंबर छह और सीमा का भाई) और अशोक फल्के (आरोपी नंबर सात) ने सचिन घारू को खत्म करने की साजिश रची।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, एक जनवरी, 2013 को आरोपियों ने सेप्टिक टैंक की सफाई के बहाने संदीप थंवर, सचिन घारू और राहुल कंडारे को सीमा के पिता के फार्म हाउस (दरंदले वास्ती, सोनाई, अहमदनगर जिला) पर बुलाया। आरोपियों के कहने पर तीनों एक जनवरी, 2013 को दोपहर एक बजे सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए उस फार्म हाउस पर पहुंच गए।

फार्महाउस सुनसान जगह पर है और टॉयलट ब्लॉक्स उससे लगे हुए थे। चूंकि संदीप थंवर देर शाम तक घर नहीं लौटे, उनके भाई कपिल थंवर ने आरोपी नंबर-3 कुरे से संपर्क किया, ‌जिसने उन्हें बताया कि संदीप और उनके दोनों दोस्त दोपहर में ही फार्महाउस से निकल गए थे; हालांकि उन्हें 8:30 बजे बताया गया कि संदीप का शव टॉयलेट ब्लॉक के सेप्टिक टैंक में पड़ा हुआ मिला है। पोपट ने पुलिस को बताया कि संदीप की मौत की एक्सिडेंट से हुई है। पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर लिया।

दो जनवरी, 2013 को, अभियुक्त नंबर एक और दो के खुलासे पर सचिन घारू और राहुल कंडारे के शव दरंदले वास्ति में एक सूखे कूएं में में पाया गया। आरोपी नंबर दो के बताने पर सचिन के शरीर के ऊपरी और निचले अंगों की भी खोज लिया गया। सचिन की गर्दन कटी हुई ‌थी, जिसके बाद सोनाई पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 302 के तहत दो जनवरी, 2013 को मामला दर्ज किया गया।

सेशन जज ने 7 में से 6 आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश दोषी करार दिया। उन्होंने धारा 366 सीआरपीसी के तहत मौत की सजा की पुष्टि के लिए कार्यवाही उच्च न्यायालय को समक्ष भेज दी।

निर्णय

सरकार की ओर से मामले में पीपी दीपक ठाकरे जेपी याग्निक पेश हुए और उन्होंने मौत की सजा की पुष्टि की मांग की। आरोपी अशोक नवगीरे की ओर से अधिवक्ता नितिन सतपुते पेश हुए और उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। एडवोकेट विजय हिरेमथ और डॉ युग मोहित चौधरी अभियुक्तों की ओर से पेश हुए और मौत की सजा को कम कर आजीवन कारावास की मांग की। उनकी दलीलें थीं कि:

(i) पारिवारिक परिस्थितियां और आरोपी की ग्रामीण पृष्ठभूमि।

(ii) कम उम्र

(iii) आपराधिक इतिहास का न होना ।

(iv) जेल में आचरण, और

(v) सुधार की संभावना।

जांच अधिकारी ने जांच पूरी होने के बाद अदालत को बताया कि मृतक के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से साबित हुआ कि कि सचिन घारू, राहुल कंडारे और संदीप थंवार एक जनवरी, 2013 को दोपहर एक बजे के बाद से दरंदेल वास्ती में थे।

तीनों की हत्या में हुई बर्बरता की ओर इशारा करते हुए कोर्ट ने कहा-

"सभी पीड़ित रक्षाहीन थे और अपराध अकारण था। यह तय हो चुका है कि अपराध पूर्णतया पूर्व नियोजित था और इसे क्रूरता और ठंडे दिमाग से अंजाम दिया गया था। आरोपियों के प्रतिशोध ने तीन अमूल्य जीवन नष्ट कर दिए, जिनमें दो मासूम थे। सबूतों से ये तय है कि आरोपियों ने भीषणतम तरीके से अपराध को अंजाम दिया। उनका उद्देश्य समाज के एक हिस्से को संकेत देना था और ये मिसाल पेश करना था कि निम्न जाति से संबंधित व्यक्ति अगर उच्‍च जाति की लड़की से प्रेम संबंध रखने का साहस करेगा तो क्या होगा। तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि आरोपियों के सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।"

अंत में, न्यायालय ने कहा-

"हमने मौजूदा मामले में सभी परिस्थितियों पर विचार किया है। न्याय की मांग है कि अदालत को अपराध के अनुसार ही दंड दे। हमारा मानना है कि अभियुक्तों की कम उम्र, आपराधिक इतिहास का ना होना और सुधार की गुंजाइश जैसे कारकों को देखते हुए भी परिस्थितियों की गंभीरता कम नहीं होती। अपराध के बाद अभियुक्तों के आचरण से स्पष्ट है कि उन्हें अपने कृत्यों पर कोई पछतावा नहीं है। इसलिए हमारा दृष्टिकोण है कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, आपराधिक इतिहास की अनुपस्थिति, सुधार की गुंजाइश आदि कारक भी परिस्थिति की गंभीरता कम नहीं करते और इस मामले को दुर्लभतम और दुर्लभ मामलों की श्रेणी से बाहर करने योग्य नहीं बनाते। हम निचली अदालतों द्वारा दी गई मौत की सता को "आजीवन कारावास " में बदलने का कोई औचित्य नहीं पाते हैं। "

इस प्रकार, अदालत ने पांच आरोपियों की मौत की सजा की पुष्टि की और नवगीरे को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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