TCS NASIK CASE : महिला कर्मचारी कमजोर स्थिति में थी, सीनियर अधिकारियों ने बनाया निशाना, अदालत ने 6 आरोपियों को जमानत देने से किया इनकार

Amir Ahmad

19 May 2026 12:12 PM IST

  • TCS NASIK CASE : महिला कर्मचारी कमजोर स्थिति में थी, सीनियर अधिकारियों ने बनाया निशाना, अदालत ने 6 आरोपियों को जमानत देने से किया इनकार

    नासिक सेशन कोर्ट ने TCS BPO से जुड़े चर्चित यौन उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण मामले में छह आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की। अदालत ने कहा कि पीड़िता एक कमजोर स्थिति में काम करने वाली नई कर्मचारी थी और आरोपी उसके सीनियर अधिकारी होने के कारण सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

    एडिशनल सेशन जज वी. वी. कथारे ने रज़ा मेमन, आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख और तौसीफ अत्तार की जमानत याचिका खारिज की। इन सभी पर पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न करने और हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप हैं।

    अदालत ने एक अलग आदेश में कंपनी की ऑपरेशंस मैनेजर अश्विनी चैनानी की जमानत अर्जी भी खारिज की।

    जज कथारे ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी पुरुषों ने पीड़िता के साथ जबरन नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की उस पर अश्लील टिप्पणियां कीं और उससे बेहद निजी सवाल पूछे। आदेश में कहा गया कि आरोपियों ने उससे पूछा कि वह अपनी शारीरिक जरूरतें कैसे पूरी करती है, उसका हनीमून कहां हुआ था और उसके अंत:वस्त्रों को लेकर भी टिप्पणी की गई।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपियों ने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।

    अदालत ने कहा,

    “सभी आरोपी पीड़िता की कमजोर स्थिति से वाकिफ थे और उन्होंने उसे निशाना बनाया। वे उसके शारीरिक स्वरूप पर अश्लील टिप्पणियां करते थे। उसकी इच्छा के खिलाफ नजदीकी बढ़ाने और शरीर को छूने की कोशिश करते थे तथा उसकी धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली टिप्पणियां करते थे। पीड़िता नई कर्मचारी होने और नौकरी खोने के डर से यह सब सहती रही।”

    अदालत ने कहा कि FIR में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और कथित कृत्यों का स्पष्ट उल्लेख है। आदेश में कहा गया कि आरोपियों ने हिंदू धर्म और आस्थाओं को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं और भगवान कृष्ण के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की, जिससे पीड़िता को गहरा मानसिक आघात पहुंचा।

    ऑपरेशंस मैनेजर अश्विनी चैनानी के संबंध में अदालत ने कहा कि पीड़िता द्वारा शिकायत करने के बावजूद उन्होंने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। आरोप है कि चैनानी ने पीड़िता से कहा कि वह हाइलाइट में आने की कोशिश न करे और आरोपियों को जाने दे।

    अदालत ने कहा,

    “POSH समिति की सदस्य होने के बावजूद उन्होंने पीड़िता की शिकायतों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाया। उन्होंने न केवल आरोपियों को संरक्षण दिया बल्कि उन्हें ऐसा व्यवहार जारी रखने के लिए बढ़ावा भी दिया। उन्होंने जो कुछ हो रहा था उस पर आंख और कान बंद कर लिए।”

    जज कथारे ने यह भी कहा कि पीड़िता साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आती है और परिवार की मदद तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए नौकरी कर रही थी।

    अदालत ने कहा,

    “यदि वह अपने सीनियर अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराती तो उसकी नौकरी और करियर पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था। साथ ही यह आशंका भी थी कि उसके माता-पिता या पति उससे नौकरी छोड़ने को कह सकते थे। इसलिए FIR दर्ज करने में हुई देरी प्रथम दृष्टया परिस्थितियों के कारण उचित प्रतीत होती है।”

    इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने सभी छह आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कीं।

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