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अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश होने पर राजीव धवन को धमकी पर मंगलवार को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
2 Sep 2019 7:45 AM GMT
अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश होने पर राजीव धवन को धमकी पर मंगलवार को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अयोध्या-बाबरी विवाद मामले की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध किया है।

मंगलवार को होगी मामले की सुनवाई

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया और CJI ने कहा कि मामले की सुनवाई मंगलवार को करेंगे।

राजीव धवन ने दाखिल की थी याचिका

यह याचिका वरिष्ठ वकील धवन ने पिछले शुक्रवार को दायर की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें अयोध्या-बाबरी मस्जिद विवाद में मुस्लिम पक्षों का प्रतिनिधित्व करने के लिए धमकी दी गई थी।

धवन को मिले पत्र में क्या लिखा है

धवन ने याचिका में यह कहा है कि उन्हें 14 अगस्त को चेन्नई के एक प्रोफेसर एन. शनमुगम का पत्र मिला जिसमें उन्हें मुस्लिम पक्षकारों के लिए कोर्ट में पेश होने के लिए धमकी दी गई थी। 88 वर्षीय प्रोफेसर द्वारा कथित रूप से लिखे गए पत्र में पूछा गया था कि धवन कैसे "अयोध्या में उनके तथाकथित अधिकार" के लिए मुसलमानों की ओर से पेश होकर "विश्वासघात" कर सकते हैं। पत्र में वरिष्ठ वकील को शाप दिया गया और कहा गया कि वह "अपनी करनी के लिए कीमत चुकाएंगे।"

"करना पड़ रहा है धमकी भरे व्यवहार का सामना"

उन्होंने कहा कि संजय कलई बजरंगी द्वारा भी व्हाट्सएप में धमकी भरे संदेश भेजे गए थे। "यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि याचिकाकर्ता को घर पर और अदालत परिसर में कई व्यक्तियों द्वारा धमकी भरे व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है," उन्होंने आगेे कहा।

"मामला 'आपराधिक अवमानना' का है"

याचिका में यह कहा गया है कि "डराने वाले पत्र" के जरिए किसी वकील को उसके कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए धमकी देना, न्याय प्रशासन के कामकाज में हस्तक्षेप करने के समान है और इसलिए ये 'आपराधिक अवमानना' का मामला है।

AG एवं SG से आपराधिक अवमानना ​​के लिए अनिवार्य मंजूरी नहीं लेने का कारण

आपराधिक अवमानना ​​के लिए अटॉर्नी जनरल की अनिवार्य मंजूरी नहीं लेने के कारण के रूप में धवन ने AG की ओर से हितों के संभावित संघर्ष का हवाला दिया, क्योंकि वह मामले के पहले दौर में उत्तर प्रदेश राज्य के लिए पेश हुए थे।

सॉलिसिटर जनरल के संबंध में धवन ने कहा कि SG ने वर्तमान मामले की पूर्व सुनवाई में यूपी सरकार के लिए पक्ष लिया था। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इस मामले में अब तक 16 दिन की सुनवाई पूरी कर ली है।

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