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दिल्ली में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कई दिशा-निर्देश जारी किए

LiveLaw News Network
16 Jan 2020 5:14 AM GMT
दिल्ली में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कई दिशा-निर्देश जारी किए
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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में वायु प्रदूषण की विकराल समस्या को दूर करने के लिए कई दिशा-निर्देश पारित किए।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कई दिशा-निर्देशों को पारित किए हैं, जिनमें पराली जलाने से लेकर वाहनों के उत्सर्जन और निर्माण की धूल तक की समस्या से निपटना शामिल है।

इस संबंध में, दिल्ली नगर निगम और हरियाणा, राजस्थान और यूपी की सरकारों को तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट दायर करने के लिए कहा गया है। साथ ही पिछले निर्देशों की अनुपालन रिपोर्ट भी दायर करने के लिए कहा गया है। प

पराली जलाना

केंद्र सरकार और पंजाब, हरियाणा और यूपी की राज्य सरकारों को डंठल या पराली जलाने से रोकने के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

उन्हें एक फसल अवशेष प्रबंधन तैयार करने के लिए भी निर्देशित किया गया है, जिसमें उसका उपयोग उर्वरक, पशु भोजन और जैव ईंधन के रूप में किया जा सकें।

उन्हें कंबाइन हार्वेस्टर्स, हैप्पी सीडर्स, हाइड्रॉलिकली रिवर्सेबल एमबी प्लाउ, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, मुल्चर, रोटरी स्लेशर, जीरो टिल सीड ड्रिल और रोटावेटर्स और बैलेर्स, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को निशुल्क या मामूली किराये के आधार पर उपलब्ध कराने के लिए एक योजना तैयार करने के लिए कहा गया है।

स्माॅग

अदालत ने दिल्ली सरकार से कनॉट प्लेस में प्रस्तावित स्मॉग टॉवर लगाने के काम को तीन महीने के भीतर पूरा करने को कहा है। इसके अलावा, आनंद विहार में भी एक ऐसी ही टॉवर की स्थापना के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अंत में, सरकार को सात दिनों के भीतर प्रायोगिक टॉवर लगाने के लिए 30 x 30 मीटर की जगह उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

अदालत ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बड़े निर्माण स्थलों,सड़क निर्माण का विस्तार, विशेष रूप से खुदाई और कॉम्पैक्टिंग या संहनन के दौरान, खनन गतिविधियाँ, कच्चे या अनपेक्षित क्षेत्रों में बड़े पार्किंग स्थल और सार्वजनिक सभाओं के दौरान और विध्वंस गतिविधियों के दौरान ''एंटी-स्मॉग गन'' के उपयोग का भी आदेश दिया है।

अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में उन परियोजनाओं में एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल को भी अनिवार्य कर दिया है, जिन्हें राज्य/केंद्रीय स्तर से पर्यावरणीय मंजूरी की आवश्यकता होती है, जिनकी खुदाई, सामग्री संचालन और अन्य धूल पैदा करने वाली गतिविधियों सहित 20,000 वर्ग मीटर से अधिक के निर्मित क्षेत्र वाली साइट है। इसके अंत में , अधिकारियों को ''प्रदूषक भुगतान या प्रदूषक भुगतान करते हैं'' सिद्धांत पर विचार करते हुए, स्थापना की लागत के संबंध में नीतिगत निर्णय लेने के लिए कहा गया है।

कचरा प्रबंधन

सभी चार राज्य सरकारों को प्लास्टिक, औद्योगिक और अन्य अपशिष्टों के डंप किए गए कचरे की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है कि कचरे को जलाया न जाए और इसे प्रसंस्करण/ भस्मीकरण के लिए उपयोग किया जाए और कचरे के ढेर को समय-समय पर हटा दिया जाए।

निर्माण और विध्वंस या तोड़फोड़ या ढ़हाने के मामले में , सरकारों से कहा है कि निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016( Construction and Demolition Waste Management Rules, 2016) के अनुपालन के बारे में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें। साथ ही बताया जाए कि मानदंडों को पूरा न करने वाले डेवलपर्स के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की कितनी सिफारिश की गई है।

यह देखते हुए कि ,दिल्ली में उत्पन्न कचरे और कचरे को उठाने के संबंध में केवल 55 प्रतिशत क्षमता उपलब्ध है, सरकार को शेष 45 प्रतिशत के संबंध में विवरण तैयार करने और इसे अदालत के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

इस विवरण में उपकरण,औजार, श्रमशक्ति और इस संबंध में आवश्यक व्यय को भी शामिल किया जाए। इस बीच, सभी चार राज्यों की सरकार से निर्माण और विध्वंस कचरे के पुनर्चक्रण की मौजूदा और कमजोर सुविधाओं को इंगित करने के लिए कहा गया है।

दूसरी समस्याएं

आदेश में, एक हद तक, कमजोर या दोषयुक्त औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, जहरीले या विषाक्त वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन और उपेक्षित यातायात प्रबंधन की उपेक्षित समस्या को भी उजागर किया गया है।

आदेश में दिल्ली एनसीआर के सीमावर्ती इलाकों के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (Environment Pollution (Prevention & Control) Authority) द्वारा किए गए दौरों पर भी ध्यान दिया गया है और उनसे वहां पाई गई समस्याओं के संबंध में उपचारात्मक उपाय करने और अनुपालन रिपोर्ट दायर करने को कहा गया है।

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