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तलाकशुदा बेटी को स्वतंत्रता सेनानी पिता की पेंशन पाने का हक़दार बनाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया

LiveLaw News Network
31 May 2020 4:10 AM GMT
तलाकशुदा बेटी को स्वतंत्रता सेनानी पिता की पेंशन पाने का हक़दार बनाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के एक फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया है। इस फ़ैसले में कहा गया था कि स्वतंत्रता सेनानी की तलाकशुदा बेटी को स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना (तुलसी देवी बनाम भारत संघ) के तहत पेंशन नहीं मिल सकती। याचिकाकर्ता पूर्व स्वतंत्रता सेनानी गोपाल राम की बेटी है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि पति से 2015 में तलाक़ के बाद वह पूरी तरह अपने मां-बाप पर निर्भर है। पिता की मृत्यु के बाद वह अपनी बीमार मां पर आश्रित हो गई, क्योंकि उसकी मां को स्वतंत्रता सेनानी योजना के तहत पेंशन मिलती थी, लेकिन मां की मौत के बाद अब पेंशन रोक दी गई।

दुष्यंत पराशर के माध्यम से दायर विशेष अनुमति याचिका में कहा गया है कि

"याचिकाकर्ता की उम्र 54 साल है और उसे कोई बच्चा नहीं है। मां-बाप (स्वतंत्रता सेनानी) की मौत के बाद वह बदहाली में जी रही है और इसलिए पूरी विनम्रता और आदर से वह स्वतंत्रता सेनानी का पेंशन उसको भी दिया जाए क्योंकि वह अपने मां-बाप की तलाकशुदा बेटी है और उसे अविवाहित बेटी के समान ही माना जाए।"

याचिकाकर्ता ने खजनी देवी बनाम भारत संघ मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फ़ैसले का भी संदर्भ दिया है, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी के पेंशन का लाभ उनकी तलाकशुदा बेटी को दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सितम्बर 2019 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के इस फ़ैसले को सही ठहराया था।

इस फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले के विरुद्ध दायर विशेष अनुमति याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा था कि

"हमारी राय में इस आदेश में सामाजिक रूप से रचनात्मक रुख अपनाया गया है और तलाकशुदा बेटी को अविवाहित बेटी का दर्जा दिया गया है। इस विचार से हम पूरी तरह सहमत हैं।"(विशेष अनुमति याचिका, डायरी नंबर 2017 का 17706, आदेश तिथि 27.09.2019)

न्यायमूर्ति यूयू ललित, न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदर और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने विशेष अनुमति याचिका पर जारी नोटिस पर जुलाई के पहले सप्ताह तक जवाब मांगा है।

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