सुप्रीम कोर्ट ने MGP की गोवा स्पीकर को 2 बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला करने के निर्देश देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया 

  • सुप्रीम कोर्ट ने MGP की गोवा स्पीकर को 2 बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला करने के निर्देश देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया 

    SC Issues Notice On Plea By MGP Leader Seeking Directions To Goa Assembly Speaker To Decide On Disqualification Of 2 MLAs

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गोवा विधानसभा अध्यक्ष को महाराष्ट्रवादी गोवंतक पार्टी ( MGP) के नेता सुदीन धवलीकर द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें 5 मई, 2019 से लंबित 2 MGP विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिका पर फैसला करने के लिए अध्यक्ष को निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

    मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने याचिका में नोटिस जारी करते हुए इसे गोवा के कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडणकर बनाम गोवा राज्य विधानसभा और अन्य की लंबित याचिका के साथ टैग किया जिसमें एक महीने के भीतर 10 बागी कांग्रेस विधायकों की अयोग्यता पर निर्णय लेने के लिए गोवा विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की मांग की गई है।

    तात्कालिक याचिका में दावा किया है कि गोवा विधानसभा स्पीकर ने "अयोग्य ठहराने वाली याचिका को तय करने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र / कर्तव्य को छोड़ दिया है, जो 3 मई, 2019 से लंबित है" और यह मुद्दा सामने आने के बाद से एक साल से अधिक समय हो गया है।

    दलीलों में कहा गया है कि

    "दसवीं अनुसूची के जनादेश के अनुसार और केशम मेघचंद्र सिंह बनाम माननीय अध्यक्ष मणिपुर विधान सभा और अन्य में इस माननीय अदालत के फैसले के अनुसार, स्पीकर को उचित समय अवधि के भीतर इस प्रकृति की एक याचिका पर निर्णय लेने की आवश्यकता है और किसी भी मामले में, अनुपस्थित अपवाद परिस्थितियों मे 3 महीने की अवधि के भीतर।"

    याचिकाकर्ता ने कहा कि कानून में निर्धारित उपरोक्त समय सीमा लंबे समय से भंग की गई है और प्रतिवादी संख्या 1 ने अनुच्छेद 14 के घोर उल्लंघन में काम किया है क्योंकि संवैधानिक रूप से बाध्य अधिकारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

    यह कहा है कि याचिकाकर्ता की अयोग्यता के लिए कोई भी कदम उठाने में विफल रहने पर, विधानसभा अध्यक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार प्राकृतिक न्याय और कानून के शासन के सभी सिद्धांतों का पूरी तरह से उल्लंघन किया है।

    इसके अतिरिक्त, दलील दी गई है कि बागी विधायक को केशम मेघचंद्र सिंह के 18.03.2020 के आदेश के संदर्भ में मंत्रियों और विधान सभा के सदस्यों के रूप में कार्य करने से अयोग्य ठहराया गया है।

    विशेष रूप से, तत्काल याचिका को गोवा कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडणकर की याचिका के साथ टैग किया गया है, जिसमें बीजेपी में शामिल 10 बागी विधायकों को विधायक और मंत्रियों के रूप में कार्य करने से रोकने की मांग की है और कहा है कि स्पीकर ने अयोग्यता का फैसला करने के लिए 3 महीने की समय सीमा का उल्लंघन किया है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर विधायक दलबदल मामले से संबंधित अपने हाल के फैसले में निर्धारित किया गया है।

    चोडणकर की याचिका में कांग्रेस के 10 विधायकों के भाजपा के साथ विलय को चुनौती दी गई है क्योंकि पार्टी या गोवा इकाई में कोई "विभाजन" नहीं था।

    याचिका में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का भी हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया था कि संसद को "पुनर्विचार" करना चाहिए कि क्या एक सदन के स्पीकर को सांसदों/ विधायकों को अयोग्य ठहराने की शक्तियां जारी रखनी चाहिए क्योंकि वो "विशेष राजनीतिक दल के हैं।

    ये याचिका AOR डी कुमानन, पार्टनर, लॉमेन एंड व्हाइट द्वारा दायर की गई है।

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