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निर्भया मामला : सुप्रीम कोर्ट ने दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज की

LiveLaw News Network
18 Dec 2019 8:20 AM GMT
निर्भया मामला : सुप्रीम कोर्ट ने दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज की
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जस्टिस आर बानुमथी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने बुधवार को निर्भया गैंग रेप-मर्डर मामले में अंतिम लंबित पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया, जिसे अक्षय कुमार सिंह ने दायर किया था। इस मामले में चार दोषियों को मौत की सजा हुई थी।

फैसला पढ़ते हुए न्यायमूर्ति बानुमथी ने कहा,

"हमने हर आधार पर विचार किया है। याचिकाकर्ता ने सबूतों को स्वीकार करने की मांग की है। इन आधारों पर पहले विचार किया गया है। इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। इन सभी का परीक्षण न्यायालय, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में किया जा चुका है।"

फैसला सुनाए जाने के बाद याचिकाकर्ता के वकील ए पी सिंह ने दया याचिका दायर करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सात दिन दया याचिका के लिए निर्धारित समय है।

इस अनुरोध पर कोई विचार व्यक्त किए बिना, पीठ ने कहा,

"हम अपने विचार व्यक्त नहीं कर रहे हैं। जो भी कानून है, याचिकाकर्ता निर्धारित समय के अनुसार दया याचिका का लाभ उठा सकते हैं"।

आज सुबह की सुनवाई के दौरान, अक्षय कुमार सिंह के वकील एडवोकेट ए पी सिंह ने कहा कि जांच दोषपूर्ण थी और उनके मुवक्किल को मीडिया और राजनीतिक दबाव के कारण बंद कर दिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि बलात्कार पीड़िता के दोस्त ने झूठे सबूत देने के लिए रिश्वत के रूप में लाखों रुपये लिए थे। उन्होंने मार्च 2013 में एक दोषी राम सिंह की आत्महत्या से संबंधित संदिग्ध परिस्थितियों के बारे में तिहाड़ जेल के पूर्व जेलर सुनील गुप्ता द्वारा दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया।

जब पीठ ने इन तथ्यों की प्रासंगिकता के बारे में सवाल किया तो ए पी सिंह ने कहा कि उन्होंने मामले में अतिरिक्त सार्वजनिक दबाव का संकेत दिया है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने वकील एपी सिंह से कहा कि पुनर्विचार में इन तथ्यात्मक तर्कों पर विचार नहीं किया जा सकता।

एपी सिंह ने पीड़िता के मरने से पूर्व दिए गए बयान पर भी सवाल किया और कहा कि पीड़ित के मरने से पूर्व दिए गए पहले बयान में अक्षय के नाम का उल्लेख नहीं किया गया था। अक्षय का नाम केवल दूसरे और थ्रिड डाइंग डिक्लेरेशन में आया था।

सिंह ने कहा, "पीड़िता तब मॉर्फिन की भारी मात्रा के प्रभाव में थी। इस हालत में वह कैसे बयान दे सकती है?"

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में गंभीर प्रदूषण के कारण, जीवन प्रत्याशा कम हो रही है और जीवन वैसे भी दयनीय हो रहा था। तो मृत्युदंड देने की क्या जरूरत है, उन्होंने प्रस्तुत किया।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सिंह की दलीलों को अपील फैसले में अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया है। एसजी ने कहा कि एक पुनर्विचार सुनवाई में फिर से उन्हीं दलीलों पेश नहीं किया जा सकता है।

अपराध की क्रूरता पर प्रकाश डालते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा,

"ऐसे अपराध होते हैं जब भगवान रोते हैं कि इस लड़की को बचाया नहीं जा सका और यह भी कि राक्षस पैदा हुए। ऐसे मामले में कोई दया नहीं हो सकती। अभियुक्तों के वकील अपरिहार्य विलंब करने की कोशिश कर रहे हैं। वे कोई याचिका दायर करते हैं, फिर वापस ले लेते हैं। मैं जल्द से जल्द इस पर निर्णय लेने के लिए अदालत से आग्रह करता हूं। "

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में मौत की सजा पाने वाले चार दोषियों में से एक अक्षय सिंह की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां को भी दलीलें देने की अनुमति दे दी थी।

दरअसल इस मामले में मौत की सजा पाने वाले चार दोषियों में से एक अक्षय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में 5 मई, 2017 को शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए फैसले पर सवाल उठाते हुए पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसमें मौत की सजा को बरकरार रखा गया।

फैसले के खिलाफ दलीलों के अलावा, उन्होंने याचिका में कुछ अजीबोगरीब दलीलें भी दी। उसके अनुसार , मौत की सजा अनावश्यक है क्योंकि दिल्ली की बिगड़ती हवा और पानी की गुणवत्ता खराब हो चुकी है। "यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दिल्ली-एनसीआर और मेट्रो शहर की वायु गुणवत्ता एक गैस चेंबर की तरह है। इतना ही नहीं, दिल्ली-एनसीआर का पानी भी जहर से भरा है। यह तथ्य भारत सरकार की रिपोर्ट से साबित होता है जो संसद में प्रस्तुत की गई सभी को पता है कि दिल्ली-एनसीआर में हवा और पानी के संबंध में क्या हो रहा है। जीवन छोटा होता जा रहा है, फिर मौत की सजा क्यों? " वकील ए पी सिंह ने ये याचिका दायर की थी।

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