Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

पीड़ित और समाज के अधिकारों को आरोपी के अधिकारों के अधीन नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
7 Oct 2019 11:11 AM GMT
पीड़ित और समाज के अधिकारों को आरोपी के अधिकारों के अधीन नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
x

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीड़ित और समाज के अधिकारों को एक आरोपी के अधिकारों के अधीन नहीं बनाया जा सकता। इस मामले में न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की पीठ अभियुक्तों की ओर से उठाए गए उस विवाद को संबोधित कर रही थी कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत बचाव के उचित अवसर से वंचित किया गया था क्योंकि उसे दिए गए 2 पेजों में विचारणीय प्रश्न अत्यंत आकस्मिक और अस्पष्ट थे। यह आरोप लगाया गया कि आरोपों के संबंध में सभी प्रासंगिक प्रश्न अभियुक्तों को नहीं दिए गए थे।

फेनुल खान बनाम झारखंड राज्य में, अदालत ने कहा कि CrPC की धारा 313 'ऑडी एल्ट्रम पालट्रम' के सिद्धांत को शामिल करता है और अपने बचाव के लिए अभियुक्तों को उनके खिलाफ अभियोजन पक्ष के आरोपों के बारे में पूरी तरह से अवगत करवाता है और उनकी बेगुनाही के समर्थन में जवाब देने का अवसर प्रदान करता है।

पीठ ने दोहराया कि CrPC की धारा 313 का पालन न करने पर चुनौती तब तक नहीं दी जा सकती जब तक कि अभियुक्त यह प्रदर्शित नहीं करता कि पक्षपात उसके ही कारण हुआ है। यह आगे कहा गया:

"लेकिन समान रूप से किसी भी चूक या अपर्याप्त सवालों के कारण एक अभियुक्त के लिए सामान्यीकृत अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। आखिरकार यह प्रत्येक मामले की प्रकृति सहित तथ्यों और परिस्थितियों में विचार किया जाने वाला प्रश्न होगा। अन्य साक्ष्य उपलब्ध होते हैं और जिस तरह के प्रश्न किसी अभियुक्त के सामने रखे जाते हैं, आगे कुछ भी माना जाता है कि अभियुक्त अपने बचाव में कह सकता है।

दूसरे शब्दों में कई कारकों का संचयी संतुलन बनाना होगा। एक अभियुक्त के अधिकार के लिए निष्पक्ष ट्रायल निस्संदेह महत्वपूर्ण है लेकिन विचलित व्यवहार के सुधार के लिए पीड़ित और समाज के बड़े पैमाने पर अधिकारों को निष्पक्ष ट्रायल के लिए आवश्यकता से अधिक आरोपी के अधिकारों के अधीन नहीं बनाया जा सकता है। "

मामले के रिकॉर्ड की जांच करते हुए पीठ ने यह निष्कर्ष निकाला कि वास्तव में CrPC की धारा 313 के तहत प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं हुई है और अभियुक्तों के प्रति कम पूर्वाग्रह हुआ और इसलिए उनकी अपील खारिज कर दी।



Next Story