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हवाई टिकट पर रिफंड : सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस और अन्य हितधारकों से केंद्र के लॉकडाउन के दौरान उड़ान रद्द करने के प्रस्ताव पर जवाब मांगा

LiveLaw News Network
9 Sep 2020 9:57 AM GMT
हवाई टिकट पर रिफंड : सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस और अन्य हितधारकों से केंद्र के लॉकडाउन के दौरान उड़ान रद्द करने के प्रस्ताव पर जवाब मांगा
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एयरलाइंस और अन्य हितधारकों को केंद्र के उस हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिनों का समय दिया है जिसमें कहा गया है कि 25 मार्च से 3 मई, 2020 के बीच हवाई यात्रा के लिए घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय वाहकों में यात्रियों द्वारा बुक किए गए टिकट की राशि को पूरी तरह से वापस कर दिया जाएगा।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने लॉकडाउन के बाद सामान्य परिचालन को फिर से शुरू करने के बाद रद्द उड़ानों पर रिफंड के मुद्दे पर केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा। पीठ ने यह भी जानने की मांग की कि क्या केंद्र का प्रस्ताव लॉकडाउन चरण के पहले के दौरान बुक किए गए टिकटों को कवर करेगा।

एयर पैसेंजर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर्यमा सुंदरम ने कहा कि याचिकाकर्ता एक या दो चीजों को छोड़कर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रस्ताव से काफी हद तक सहमत हैं।

स्पाइसजेट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि उनके मुवक्किल केंद्र सरकार के प्रस्ताव से खुश हैं, जबकि गो एयर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी दातार ने कहा कि उनके हलफनामे पर आपत्ति के कुछ बिंदु हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी इंडिगो एयरलाइंस के लिए पेश हुए और कहा कि उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए। एयर विस्तारा और एयर एशिया के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता पिनाकी मिश्रा ने भी जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।

वकील लिज़ मैथ्यू ने प्रस्तुत किया कि उनके मुवक्किल ने दिसंबर 2019 में यात्रा के लिए टिकट बुक किया था, जिसके लिए बाद में लॉकडाउन लगाया गया था। वह स्पष्टीकरण चाहती हैं कि क्या ऐसे मामलों को भी धन वापसी का लाभ मिलेगा।

वकील नीला गोखले ने प्रस्तुत किया कि केंद्र के हलफनामे में ट्रैवल एजेंटों की चिंताओं का समाधान नहीं किया गया है, जिनका पैसा एयरलाइंस के पास पड़ा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता पल्लव शिशोदिया ने सुझाव दिया कि क्रेडिट शेल यात्री के बजाय टूर ऑपरेटर के पास जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति भूषण असहमत थे। उन्होंने टिप्पणी की, "पैसे देने वाले यात्री हैं। क्रेडिट शेल ऑपरेटर को क्यों जाना चाहिए?" इस मामले पर अब 23 सितंबर को आगे विचार के लिए सूचीबद्ध किया गया है।"

पिछली सुनवाई में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एक हलफनामा दायर कर कहा कि यात्रियों द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए 25 मार्च से 3 मई, 2020 के बीच बुक किए गए टिकटों की राशि पूरी तरह से वापस कर दी जाएगी।

वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम ने मामले में सभी एयरलाइंस को पक्षकार बनाने की अनुमति भी मांगी थी।

केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि न तो CAR के प्रावधानों को खत्म किया गया और न ही निलंबन के तहत जगह दी गई।

"यह प्रस्तुत किया गया है कि उक्त आदेश मुख्य रूप से दो उद्देश्यों के लिए जारी किया गया था: - सबसे पहले, यह स्पष्ट करने के लिए कि एयरलाइंस रिफंड से इनकार करने के लिए लॉकडाउन का आश्रय नहीं ले सकती हैं, और दूसरी बात, एयरलाइंस को रिफंड के लिए थोड़ा विस्तारित समय देने के लिए; उस समय कोई संचालन नहीं होने दिया गया था और एयरलाइंस के पास पैसे की कमी की चिंता थी। हालांकि, यह सम्मानपूर्वक प्रस्तुत किया गया है कि किसी भी CAR का उल्लंघन करने का आदेश कभी नहीं दिया गया था। "

11 जून को, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से रुख साफ करने को कहा था और नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सभी संबंधित एयरलाइनों से तौर-तरीकों पर चर्चा करने और न्यायालय को जवाब देने के लिए कहा था। एसजी ने कहा था कि उनकी निजी राय है कि पैसा रिफंड किया जाना चाहिए।

वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे स्पाइसजेट की ओर से पेश हुए थे और उन्होंने अदालत को अवगत कराया था कि महामारी के कारण एयरलाइंस को वैश्विक स्तर पर $ 60 बिलियन से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा था। यह आगे बताया गया कि एयरलाइनों को शून्य राजस्व के साथ उड़ान की लागत को 49% तय किया गया था।

अधिवक्ता जोस अब्राहम की ओर से प्रवासी लीगल सेल द्वारा याचिका दायर की गई है और इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि रद्द करने के कारण टिकटों के लिए एकत्र की गई पूरी धनराशि की गैर-वापसी की कार्रवाई "मनमानी है और नागरिक उड्डयन नागर विमानन महानिदेशालय की जारी की गई आवश्यकता के उल्लंघन में है।"

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने कहा था कि एकत्र की गई धनराशि का पूरा रिफंड प्रदान करने के बजाय, "क्रेडिट शेल" अनिवार्य करने की एयरलाइंस की कार्रवाई DGCA की आवश्यकताओं के स्पष्ट उल्लंघन में है , जिसके अनुसार रिफंड का विकल्प "यात्री का विशेषाधिकार" है और एयरलाइन का डिफ़ॉल्ट प्रचलन नहीं है।

इसके अलावा, याचिका में कहा गया है कि एयरलाइन कंपनियों को "चुनौतीपूर्ण समय का उपयोग करने के अवसर के रूप में" पहले से ही दुखी लोगों से गैरकानूनी लाभ लेने की बजाए "मानवीय गुण" दिखाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि लॉकडाउन के दौरान किसी को भी टिकट बुक करने का सवाल नहीं उठता है क्योंकि यात्री उड़ानें पहले ही रद्द कर दी गई थीं और इससे 16 अप्रैल का " ऑफिसर मेमोरेंडम " अस्पष्ट और "किसी भी तर्क से रहित" हो जाता है। "

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