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ऐसा कोई अनुमान नहीं हो सकता कि अभियोजन पक्ष हमेशा पूरी सच्चाई बताएगा, बलात्कार केस में आरोपी बरी, पढ़िए हाईकोर्ट का फैसला

LiveLaw News Network
6 Sep 2019 6:13 PM GMT
ऐसा कोई अनुमान नहीं हो सकता कि अभियोजन पक्ष हमेशा पूरी सच्चाई बताएगा, बलात्कार केस में आरोपी बरी, पढ़िए हाईकोर्ट का फैसला
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बलात्कार के एक आरोपी को बरी करते हुए, त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसा कोई भी अनुमान नहीं हो सकता कि अभियोजन पक्ष हमेशा पूरी सच्चाई को बताएगा।

न्यायमूर्ति अरिंदम लोध ने कहा कि अभियोजन पक्ष को अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करना होगा, यह सिद्धांत बलात्कार के मामले में भी समान रूप से लागू होता है।

आपराधिक अपील की अनुमति देते हुए, अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे मामले को साबित करने में विफल रहा और इस तरह अभियुक्त संदेह का लाभ पाने का हकदार है।

इस मामले में, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने CrPC की धारा 161 और 164 (5) के तहत दर्ज अपने बयान के दौरान घटना के घटित होने की पूरी कहानी नहीं बताई, लेकिन अपने परीक्षण के दौरान उसने अपनी कहानी को सुधारने की कोशिश की। आरोपी को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा:

यह अदालत इस तथ्य के प्रति सचेत है कि बलात्कार के एक मामले में अभियोजक के बयान को प्राथमिक विचार दिया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही अभियोजन पक्ष को अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करना होगा यह व्यापक सिद्धांत रेप के मामले में समान रूप से लागू होता है। बलात्कार के मामले में ऐसा कोई अनुमान नहीं हो सकता है कि अभियोजन पक्ष हमेशा पूरी कहानी सच्चाई से बताएगा।

एक महिला के साथ बलात्कार करने का दोषी पाए जाने पर ट्रायल कोर्ट ने बिमल अचारी को सात साल की सजा सुनाई थी। सज़ा के बाद उसने उच्च न्यायालय में अपील की जिसमें उच्च न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष अपने बयान में कहानी को सुधारा और अतिरंजित किया था। न्यायालय ने यह भी कहा कि कोई उचित स्पष्टीकरण नहीं था कि 24 जुलाई 2009 को प्राथमिकी दर्ज करने से उसे क्यों रोका गया था? क्यों उसने 25 जुलाई, 2009 को एफआईआर दर्ज की, जब घटना 23 / 24 जुलाई, 2009 की मध्यरात्रि में हुई।



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