विधानसभा सदस्य बने बिना दोबारा मंत्री बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिहार सरकार और दीपक प्रकाश को नोटिस
Amir Ahmad
15 Jun 2026 7:03 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को नोटिस जारी किया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि विधायक चुने बिना उन्हें फिर से मंत्री बनाया गया, जो संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह ने दायर की।
याचिका में कहा गया कि दीपक प्रकाश राज्य विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें मंत्रिपरिषद में बनाए रखना संविधान सम्मत नहीं है।
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला देते हुए कहा कि कोई गैर-विधायक अधिकतम छह महीने तक मंत्री रह सकता है, लेकिन इस अवधि के भीतर उसे राज्य विधानमंडल का सदस्य निर्वाचित होना अनिवार्य है। यह छूट केवल एक बार के लिए है और सरकार बदलने के साथ इसे फिर से लागू नहीं किया जा सकता।
याचिका के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 नवंबर 2025 को दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया था, जबकि वे उस समय भी विधायक नहीं थे। इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार सरकार गिर गई और मंत्रिपरिषद भंग हो गई।
करीब 22 दिनों के अंतराल के बाद 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने दीपक प्रकाश को फिर से मंत्री नियुक्त कर दिया।
याचिका में कहा गया कि पहली नियुक्ति के आधार पर विधायक बनने की छह महीने की संवैधानिक अवधि 20 मई 2026 को समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद दोबारा नियुक्ति करके इस अवधि को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाने का प्रयास किया गया।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2001 के एस.आर. चौधरी बनाम पंजाब राज्य मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अनुच्छेद 164(4) के तहत मिलने वाली छह महीने की छूट न तो नवीनीकृत की जा सकती है और न ही पुनर्जीवित। मुख्यमंत्री बदलने, मंत्रिमंडल में फेरबदल, सरकार गिरने या पुनर्नियुक्ति के जरिए इस अवधि को फिर से शुरू नहीं किया जा सकता।
याचिका में यह भी कहा गया कि यदि निर्वाचित हुए बिना किसी व्यक्ति को बार-बार मंत्री पद दिया जाता है तो इससे संसदीय लोकतंत्र, प्रतिनिधिक शासन, सामूहिक उत्तरदायित्व और चुनावी जवाबदेही जैसे संवैधानिक सिद्धांत कमजोर होंगे।
याचिकाकर्ता ने 'किस अधिकार से पद पर बने हुए हैं' संबंधी रिट जारी करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि दीपक प्रकाश से पूछा जाए कि वह किस संवैधानिक अधिकार के तहत मंत्री पद पर बने हुए। साथ ही उनकी पुनर्नियुक्ति को असंवैधानिक और शून्य घोषित करने की मांग भी की गई।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 164(2), 164(4) और 141 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। इसके अलावा, संवैधानिक नैतिकता और कानून के शासन के सिद्धांतों का भी हवाला दिया गया।

