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राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा, सीएए के तहत दी जाने वाली नागरिकता की प्रक्रिया बताएं

LiveLaw News Network
5 Jan 2020 5:15 AM GMT
राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा, सीएए के तहत दी जाने वाली नागरिकता की प्रक्रिया बताएं
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राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत पड़ोसी देशों के सताए हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की प्रक्रिया की व्याख्या करे।

न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई और न्यायमूर्ति मनोज कुमार गर्ग की पीठ वर्ष 2017 में न्यायालय द्वारा स्वत-संज्ञान लेते हुए पंजीकृत एक रिट याचिका पर विचार कर रही थी। एमिकस क्यूरी सज्जन सिंह राठौर ने पीठ को नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अधिनियमित होने की जानकारी दी।

इन मुद्दों को हल करने के लिए सभी पक्षों को समय देते हुए पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 फरवरी 2020 की तारीख तय की है।

यह आदेश इस प्रकार है-

''12 दिसंबर, 2019 को लागू हुए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत पड़ोसी देशों के सताए हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के संबंध में मुद्दों के समाधान के लिए पक्षकारों के वकीलों ने कुछ समय दिए जाने की प्रार्थना की। जो समय मांगा गया था वो वकीलों को दे दिया गया। अब इस मामले पर 3 फरवरी 2020 को सुनवाई होगी।''

वर्ष 2017 में, न्यायालय ने ''दैनिक भास्कर'' की एक रिपोर्ट पर संज्ञान लिया था कि जोधपुर का जिला प्रशासन भारत की नागरिकता के लिए उनके अधिकारों की जांच किए बिना पाकिस्तान के नागरिकों को निर्वासित करने के लिए कड़े कदम उठा रहा है।

अपने आदेश में न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि-

" वर्ष 1947 में भारतीय उपमहाद्वीप में विभाजन की त्रासदी के निशान अभी भी हमारे समाज में गहरी चोटों के साथ दिखाई दे रहे हैं और इसका एक उदाहरण पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश में भी रहने वाले अल्पसंख्यक लोगों भी इच्छा है कि वे भारत में शरण लें।

चूंकि सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक कारणों से उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। पश्चिमी सीमा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भारी संख्या में पाकिस्तान से आए प्रवासी बसे हुए हैं। वास्तव में पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से से, पाकिस्तान के नागरिक बड़ी संख्या में भारत की ओर पलायन कर रहे हैं।"

न्यायालय ने यह भी नोट किया था कि राजस्थान राज्य के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर और जोधपुर जिलों में ऐसे हजारों व्यक्ति शिविर लगा रहे हैं।

कोर्ट ने कहा था कि-

''ऐसे प्रवासियों ने भारत सरकार से उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए कई अनुरोध किए और भारत सरकार ने भी समय-समय पर इस मामले में कार्रवाई की और ऐसे व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए कई अधिसूचनाएं /परिपत्र जारी किए। सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के बावजूद कई लोग अभी भी भारतीय नागरिकता के बिना भारत में रह रहे हैं। ऐसे लोग भारत में रह रहे हैं जिन्हें पाकिस्तान में सताया जा रहा है।

भारतीय नागरिक नहीं होने के कारण कई मौकों पर सरकार ने उन्हें उनके मूल देश में भेजना उचित समझा, लेकिन स्थिति यह है कि ऐसे व्यक्तियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, हालांकि उनकी कोई गलती नहीं है,फिर भी गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए कोई शांतिपूर्ण स्थान नहीं मिल रहा है, जो कि इंसान के लिए एक न्यूनतम आवश्यकता है।''

1 सितंबर 2017 को, डिवीजन बेंच ने अधिकारियों को यह निर्देश देते हुए भी एक आदेश पारित किया था कि अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित किसी भी पाकिस्तानी प्रवासी को निर्वासित न करें, यदि उसने दीर्घकालिक वीजा के लिए आवेदन किया है या अन्यथा सुरक्षा उद्देश्य के लिए विशेष कारणों के बिना इसका इरादा रखता है। बाद में, इन प्रवासियों को दीर्घकालिक वीजा जारी करने के बारे में निर्देश पारित किए गए थे।

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




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