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PM मोदी पर बायोपिक : सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले पर लगाई मुहर, मतदान तक नहीं होगी रिलीज

Live Law Hindi
26 April 2019 8:47 AM GMT
PM मोदी पर बायोपिक : सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले पर लगाई मुहर, मतदान तक नहीं होगी रिलीज
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी बायोपिक अब चुनाव तक रिलीज नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फिल्म निर्माता की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें चुनाव आयोग के 9 अप्रैल के फिल्म की रिलीज को रोकने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

पीठ ने दखल देने से किया मना
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने चुनाव आयोग की रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि कोर्ट इस मामले में दखल नहीं देगा और फिल्म रिलीज हो या नहीं, ये देखना चुनाव आयोग का काम है।

पीठ ने याचिकाकर्ता की उस मांग को भी ठुकरा दिया जिसमें फिल्म के प्रोमो या ट्रेलर को प्रसारित करने की अनुमति मांगी गई थी।

दरअसल 22 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बायोपिक को देखने के बाद चुनाव आयोग ने अपनी सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने इसे देखने के बाद चुनाव आयोग को कहा था कि वो इसकी प्रति याचिकाकर्ता फिल्म निर्माता को भी सौंप दें।

चुनाव आयोग ने फ़िल्म रिलीज़ पर रोक को सही ठहराया
जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग ने रिपोर्ट में फिल्म की रिलीज को रोकने के अपने कदम को सही ठहराया था और कहा था कि अगर फ़िल्म रिलीज़ होने दी जाती है तो इससे मतदाता प्रभावित हो सकते हैं लिहाजा मतदान तक यानी 19 मई तक फिल्म की रिलीज को रोका जाना चाहिए।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल को चुनाव आयोग को यह निर्देश दिया था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बायोपिक की पूरी फिल्म देखे और सीलबंद कवर में कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपे कि क्या चुनाव के दौरान इसकी स्क्रीनिंग की अनुमति दी जा सकती है।

पीठ ने यह अंतरिम आदेश बायोपिक के निर्माता द्वारा दायर उस याचिका पर दिया था जिसमें यह आरोप लगाया कि आयोग ने बिना किसी अधिकार क्षेत्र के इस प्रतिबंध आदेश को पारित किया है।

फिल्म निर्माताओं ने जताई थी इस रोक पर आपत्ति

निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पीठ को बताया था कि चुनाव आयोग ने पूरी फिल्म देखे बिना ही इस प्रतिबंध को लगा दिया है और यह फैसला सिर्फ ट्रेलर पर आधारित था।

उन्होंने तर्क दिया था कि चुनाव आयोग की रोक उनके बोलने और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। निर्माता ने तर्क दिया था कि सेंसर बोर्ड द्वारा प्रमाणन दिए जाने के बाद आयोग के पास फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। उन्होंने फ़िल्म रिलीज़ पर रोक हटाने और बायोपिक को तुरंत रिलीज करने की अनुमति देने की प्रार्थना की थी।

चुनाव आयोग का आदेश
इससे पहले 9 अप्रैल को चुनाव आयोग ने "राजनीतिक सामग्री" पर प्रतिबंध लगाने वाला एक आदेश पारित किया था। आदेश में कहा गया था, "इस तरह की राजनीतिक सामग्री" स्तर के खेल के मैदान के लिए एक गंभीर खतरा है क्योंकि यह टेलीविजन/सिनेमा/इंटरनेट आधारित मनोरंजन कार्यक्रमों/सोशल मीडिया के माध्यम से दिखाए जा रहे ऐसे कंटेंट की सत्यता की छाप पैदा कर सकता है। आयोग ने कहा कि आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन को रोकने के लिए चुनाव अवधि के दौरान इस तरह की राजनीतिक सामग्री पर रोक लगाई जानी चाहिए।"

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बायोपिक सहित कुछ फिल्मों की रिलीज के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली शिकायतों पर यह आदेश पारित किया गया था। हालांकि आयोग ने यह माना कि ऐसी सामग्री 'विज्ञापनों' की श्रेणी में नहीं आएगी, फिर भी उसने आशंकाओं को देखते हुए हस्तक्षेप करने की आवश्यकता महसूस की।

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