नए संसद भवन के उद्घाटन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, राष्ट्रपति से उद्घाटन कराने की मांग

Brij Nandan

25 May 2023 8:23 AM GMT

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    नए संसद भवन के उद्घाटन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति से संसद भवन का उद्घाटन कराने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका दायर की गई है।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि लोकसभा सचिवालय ने राष्ट्रपति को उद्घाटन के लिए आमंत्रित न करके संविधान का उल्लंघन किया है।

    एडवोकेट सीआर जया सुकिन ने पार्टी-इन-पर्सन के रूप में याचिका दायर की है। याचिका में लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की मांग की गई है कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति से कराया जाए।

    गौरतलब है कि 18 मई को लोकसभा महासचिव की ओर से बताया गया था कि नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को होना। इसका उद्घाटन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

    याचिकाकर्ता ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 का जिक्र किया है। कहा कि इसके मुताबिक संसद, राष्ट्रपति और दोनों सदनों से मिलकर बनती है।

    आगे कहा गया- राष्ट्रपति, देश का प्रथम नागरिक होता है। राष्ट्रपति के पास संसद सत्र बुलाने और सत्रावसान करने की शक्ति है। राष्ट्रपति ही प्रधान मंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है और तो और सभी कार्यकारी कार्य राष्ट्रपति के नाम पर किए जाते हैं। राष्ट्रपति को समारोह में आमंत्रित न करना भारतीय संविधान का उल्लंघन है।

    याचिकाकर्ता ने ये भी कहा- लोकसभा सचिवालय का बयान मनमाने तरीके से, बिना उचित दिमाग लगाए जारी किया गया है।

    आगे कहा,

    "भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए आमंत्रित न करना, संविधान का उल्लंघन है। भारतीय राष्ट्रपति को कुछ शक्तियां प्राप्त हैं। इनमें कार्यकारी, विधायी, न्यायपालिका, आपातकालीन और सैन्य शक्तियां शामिल हैं।“

    आपको बता दें, कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दलों ने उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने का फैसला किया है। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दरकिनार कर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से नए संसद भवन का उद्घाटन कराने का फैसला न केवल गंभीर अपमान है, बल्कि ये लोकतंत्र पर भी सीधा हमला है।

    आगे कहा,

    “ राष्ट्रपति के बिना संसद कार्य नहीं कर सकती है। फिर भी, प्रधानमंत्री ने उनके बिना नए संसद भवन का उद्घाटन करने का निर्णय लिया है। ये अशोभनीय कृत्य राष्ट्रपति के पद का अपमान करता है। संविधान की भावना का उल्लंघन करता है।“

    वे दल जिन्होंने समारोह का बहिष्कार करने का फैसला किया है- कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, DMK, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (उद्धव गुट), समाजवादी पार्टी, राजद, CPI, JMM, केरल कांग्रेस (मणि), VCK, रालोद, राकांपा, JDU, CPI (M), IUML, नेशनल कॉन्फ्रेंस, RSP और MDMK।



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