Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

दया याचिकाओं का समयबद्ध निपटारा : सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिकाओं के लिए लिखित गाइडलाइन की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा 

LiveLaw News Network
27 May 2020 10:24 AM GMT
दया याचिकाओं का समयबद्ध निपटारा : सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिकाओं के लिए लिखित गाइडलाइन की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा 
x

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर नोटिस जारी कर सरकार से जवाब मांगा है जिसमें दया याचिका के समय पर निस्तारण के लिए दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ,जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने गृह मंत्रालय से जवाब मांगा और जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया।

सीजेआई ने कहा,

"प्रारूप आवश्यक नहीं है। केवल एक चीज जो हमने महत्वपूर्ण महसूस की, वह है समय सीमा और यहां तक ​​कि उसके लिए हम राष्ट्रपति को निर्देशित नहीं कर सकते। केवल हम जिस पर विचार कर सकते हैं, वह है, राष्ट्रपति के पास भेजने से पहले MHA (गृह मंत्रालय) को समय सीमा पर निर्देश देना। "

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता प्रतिवादी के लिए पेश हुए और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा जो पीठ ने प्रदान किया।

पीठ शिव कुमार त्रिपाठी की ओर से वकील कमल गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, ताकि समयबद्ध अवधि के भीतर दया याचिकाओं के निपटारे के लिए विशिष्ट प्रक्रिया, नियम और दिशानिर्देश तैयार करने के लिए उचित निर्देश जारी किए जा सकें।

दलीलों में कहा गया है कि

"भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत गारंटीकृत अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है, साथ ही दोषियों की दया याचिकाओं के निपटान में उचित प्रक्रिया, नियमों और दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने के कारण पीड़ितों के अधिकारों का भी उल्लंघन किया जा रहा है। समयबद्ध तरीके से दया याचिकाओं को निपटाने के लिए निर्दिष्ट लिखित प्रक्रिया, नियम और दिशा-निर्देश ना होने के परिणामस्वरूप दया याचिकाओं के निपटान में मनमानी और भेदभाव होता है .... साथ ही इनके निपटान में अनुचित देरी होती है। "

इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने कहा कि यह उचित है कि दया याचिकाओं को समयबद्ध अवधि के भीतर निपटाने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश तुरंत तैयार किए जाएं और लागू किए जाएं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि चूंकि माफी या दया के लिए राष्ट्रपति को दी गई शक्ति एक "असाधारण शक्ति" है, इसलिए इसे बहुत सावधानी और सूझबूझ के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए और साथ ही "प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को प्रत्येक मामले में समान रूप से प्रयोग किया जाना चाहिए"

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने कहा कि

"शक्ति के दुरुपयोग की आशंका" न्याय प्रशासन को प्रभावित करती है। इसके प्रकाश में, याचिकाकर्ता ने संयुक्त राज्य अमेरिका और इंग्लैंड के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयों की सूची दी है , जिसमें उन्होंने कहा है कि "पहले से ही दया याचिका दायर करने के उद्देश्य से नियमों को तैयार किया है।"

याचिकाकर्ता ने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान में दया याचिकाओं से निपटने के लिए कोई लिखित प्रक्रिया नहीं है, लेकिन व्यवहार में, वह या उनके रिश्तेदार राष्ट्रपति को लिखित रूप में दया याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं, जिसकी तब MHA द्वारा जांच की जाती है। इसके बाद, याचिका का निपटारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत किया जाता है और राज्य / संघ राज्य क्षेत्र माफी के बारे में अपनी राय देते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस राय को प्रस्तुत करने के लिए, इसमें कोई समयावधि नहीं है।

याचिका डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



Next Story