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'दोनों पक्षों को एक साथ रहने के लिए राजी करने का कोई मतलब नहीं, रिश्ता भावनात्मक रूप से मर चुका है': सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 में निहित अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए शादी को रद्द करने की अनुमति दी

LiveLaw News Network
15 Sep 2021 5:50 AM GMT
दोनों पक्षों को एक साथ रहने के लिए राजी करने का कोई मतलब नहीं, रिश्ता भावनात्मक रूप से मर चुका है: सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 में निहित अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए शादी को रद्द करने की अनुमति दी
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सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 में निहित अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए शादी को रद्द करने की अनुमति दी और कहा कि दोनों पक्षों को एक साथ रहने के लिए राजी करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि दंपति की बीच का रिश्ता भावनात्मक रूप से मर चुका है।

इस मामले में पति ने पत्नी द्वारा क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी। निचली अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि क्रूरता का कोई मामला नहीं बनता है। हाईकोर्ट ने भी बर्खास्तगी को बरकरार रखा।

सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष, पति ने प्रस्तुत किया कि वे 16 वर्षों से अधिक समय से अलग रह रहे हैं और सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए विवाह मर चुका है। उन्होंने दो फैसलों का जिक्र किया। सुखेंदु दास बनाम रीता मुखर्जी और मुनीश कक्कड़ बनाम निधि कक्कड़ मामले में दिए गए फैसले के आधार पर यह प्रस्तुत किया कि अदालत ने अतीत में, विवाह को समाप्त करने के लिए अनुच्छेद 142 शक्तियों का उपयोग किया है, जब वे पूरी तरह से अक्षम और अपरिवर्तनीय हैं।

पीठ ने इन निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा,

"सुखेंदु दास बनाम रीता मुखर्जी (सुप्रा) में, यह मानते हुए कि विवाह में सुधार मुमकिन नहीं है, इस न्यायालय ने पक्षकारों के बीच विवाह को यह देखते हुए विवाह समाप्त कर दिया कि वे 17 से अधिक वर्षों से अलग रह रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच पूर्ण न्याय करने के लिए कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है। मुनीश कक्कड़ बनाम निधि कक्कड़ (सुप्रा) में इस अदालत ने वैवाहिक विवाद को समाप्त कर दिया, जो उसमें पक्षों के बीच दो दशकों से चल रहा था।"

अदालत ने इस मामले में कहा कि पत्नी ने जोर देकर कहा है कि वह शादी को समाप्त के लिए तैयार नहीं है।

पीठ ने कहा,

"दोनों पक्षों के बीच रिश्ते भावनात्मक रूप से मर चुके हैं और उन्हें अब साथ रहने के लिए मनाने का कोई मतलब नहीं है। इसलिए, यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार क्षेत्र के प्रयोग के लिए एक उपयुक्त मामला है।"

पीठ ने कहा कि पक्षकारों को शादी रद्द करने की अनुमति है।

केस का नाम: सुभ्रांसु सरकार बनाम इंद्राणी सरकार (नी दास)

केस नंबर: 2021 का सीए 5696

Citation: एलएल 2021 एससी 455

कोरम: जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई

वकील: अपीलकर्ता के लिए सीनियर एडवोकेट निखिल नय्यर, एडवोकेट रंजन मुखर्जी (एमिकस)

आदेश की कॉपी यहां पढ़ें:



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