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'एनएचआरसी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहा है': सुप्रीम कोर्ट में रिक्तियों को भरने के लिए याचिका दायर

LiveLaw News Network
10 Aug 2021 11:35 AM GMT
एनएचआरसी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहा है: सुप्रीम कोर्ट में रिक्तियों को भरने के लिए याचिका दायर
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका को स्थगित किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश का सर्वोच्च मानवाधिकार प्रहरी अपनी पूरी क्षमता के साथ 9 सितंबर, 2021 तक चलता रहे।

यह मामला न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील राधाकांत त्रिपाठी ने अपने में रिट याचिका में कहा गया है यह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के इतिहास में पहली बार अपनी स्थापना के बाद से देश का शीर्ष मानवाधिकार प्रहरी अपनी पूरी क्षमता के साथ नहीं काम कर पा रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील राधाकांत त्रिपाठी ने अपने में रिट याचिका में कहा गया है कि 2019 में संशोधित मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत आवश्यक दो सदस्यों और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अन्वेषण महानिदेशक की रिक्तियां खाली पड़ी हैं।

याचिका में कहा गया है कि,

"सरकार की निष्क्रियता के कारण NHRC विकलांग हो गया है। NHRC में रिक्तियों को भरने में प्रतिवादियों की लापरवाही, विफलता और निष्क्रियता भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।"

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि 2019 में संशोधित मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 3 में एक अध्यक्ष और पांच अन्य सदस्यों के साथ एक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन और अधिनियम की धारा 11 के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अन्वेषण महानिदेशक की नियुक्ति निर्धारित है। अधिनियम की धारा 7 में अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यवाहक अध्यक्ष की नियुक्ति का प्रावधान है।

याचिका में कहा गया है कि,

"सदस्यता के लिए एक नया पद 2019 में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के संशोधन द्वारा बनाया गया है। अन्वेषण महानिदेशक का पद मई 2020 से प्रभात सिंह, आईपीएस की सेवानिवृत्ति के बाद से खाली पड़ा है, जो कि NHRC के अन्वेषण महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।"

त्रिपाठी ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि एनएचआरसी में दो सदस्यों और अन्वेषण महानिदेशक की नियुक्ति न होने से यह कानून की नजर में विकलांग और बेकार हो गया है।

याचिका में कहा गया है कि इसलिए यह सीधे न्याय प्रशासन और कानून के शासन, मामलों की बढ़ती लंबितता और गंभीर मामलों की जांच से जुड़ा हुआ है। एनएचआरसी के अध्यक्ष, सदस्यों और अन्वेषण महानिदेशक की नियुक्ति में सरकार की लापरवाही और निष्क्रियता मनमानी और अनुचित है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।

अब इस मामले की सुनवाई 9 सितंबर, 2021 को होने की उम्मीद है।

केस का शीर्षक: राधाकांत त्रिपाठी बनाम भारत संघ

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