NEET-UG 2026 : OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप, छह अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा
Amir Ahmad
4 Aug 2026 1:38 PM IST

NEET-UG 2026 परीक्षा के छह अभ्यर्थियों ने अपनी OMR शीट में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
उनका दावा है कि परीक्षा के दौरान उन्होंने जिन उत्तरों को चिह्नित किया, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा परिणाम घोषित होने के बाद उपलब्ध कराई गई OMR शीट में वे उत्तर अलग दिखाई दे रहे हैं।
मंगलवार को मामले का उल्लेख चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया गया। याचिकाकर्ताओं ने काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की।
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट ने बताया कि सभी छह अभ्यर्थियों ने 600 से 650 से अधिक अंक प्राप्त किए, लेकिन उनका कहना है कि NTA द्वारा उपलब्ध कराई गई OMR शीट में दर्ज उत्तर परीक्षा के दौरान उनके द्वारा भरे गए उत्तरों से मेल नहीं खाते।
वकील ने कोर्ट से कहा,
"यह याचिका NEET परीक्षा से संबंधित है। छह छात्रों का कहना है कि उन्होंने OMR शीट में जो उत्तर भरे थे, NTA अब जो प्रति उपलब्ध करा रहा है, उसमें वे अलग हैं।"
अधिवक्ता ने दलील दी कि NTA ने OMR शीट से संबंधित तथ्यात्मक त्रुटियों पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया था लेकिन उस समय तक कोई विसंगति दिखाई नहीं दे रही थी। कथित गड़बड़ी परिणाम घोषित होने के बाद सामने आई।
उन्होंने कहा,
"जब आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया था, उस समय OMR शीट सही थी। परिणाम घोषित होने के बाद यह अंतर सामने आया।"
इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ताओं ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया था।
वकील ने जवाब दिया कि उन्होंने ईमेल भेजे और NTA कार्यालय भी गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया,
"हम NTA कार्यालय भी गए। वहां अधिकारियों ने सीधे कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट जाइए, हमें इससे कोई मतलब नहीं।"
पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पूछा कि क्या छात्रों ने निर्धारित समय के भीतर कोई आपत्ति दर्ज कराई थी।
इस पर वकील ने कहा कि जब आपत्ति दर्ज कराने की अवधि चल रही थी, तब कथित विसंगति सामने नहीं आई, इसलिए प्रभावी आपत्ति दर्ज कराना संभव नहीं था।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि काउंसलिंग प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है, इसलिए मामले की तत्काल सुनवाई आवश्यक है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर कोई आदेश पारित नहीं किया।


