शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज नहीं हो सकता': NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Amir Ahmad

27 July 2026 12:05 PM IST

  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज नहीं हो सकता: NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) द्वारा कथित बल प्रयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाओं में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और अत्यधिक बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई।

    सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,

    "यदि कहीं अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। यह केवल दिल्ली का मामला नहीं है। पूरे देश में एक समान कार्यप्रणाली की आवश्यकता है। केवल इसलिए कि प्रदर्शन हो रहा है, लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अनुशासन आवश्यक है।"

    सुनवाई की शुरुआत में राज्यसभा सांसद मनोज झा की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में व्यापक तथ्यों के साथ रिट याचिका दायर की गई, जिसमें बिहार में हुई गोलीबारी की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। अन्य पक्षकारों ने भी छात्रों के साथ कथित मारपीट से जुड़े मामलों को सूचीबद्ध याचिकाओं के साथ सुनने का अनुरोध किया।

    एक सीनियर एडवोकेट ने पूरे देश के लिए समान दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आज (सोमवार) सूचीबद्ध मामलों के साथ इन याचिकाओं पर भी अगली सुनवाई की जा सकती है।

    इसी दौरान पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से पेश वकील ने भी मामले में पक्षकार बनने की अनुमति मांगी और दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मियों के साथ भी मारपीट हुई।

    इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,

    "शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा पूर्ण रूप से संरक्षित है। जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, केवल प्रदर्शन होने के आधार पर अत्यधिक बल प्रयोग नहीं किया जा सकता।"

    जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी कहा कि चाहे चोट पुलिसकर्मी को लगी हो या छात्र को, दोनों ही समान रूप से गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अदालत राज्यों से यह भी पूछ सकती है कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिस को पर्याप्त और उचित व्यवस्था क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई।

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