8 सितंबर के बाद NGT की तीन पीठें बंद होने का खतरा, बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी तत्काल राहत
Amir Ahmad
31 Aug 2026 7:42 PM IST

NGT
राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT की तीन क्षेत्रीय पीठों के 8 सितंबर के बाद कामकाज ठप होने की आशंका जताते हुए NGT बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की।
एसोसिएशन ने कहा कि अधिकरण के सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया नहीं गया या नई नियुक्तियां समय पर नहीं हुईं तो तीन क्षेत्रीय पीठें काम नहीं कर पाएंगी।
मामले को सोमवार को भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए उठाया गया।
याचिका पहले 15 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी लेकिन बार एसोसिएशन ने 8 सितंबर से पहले सुनवाई करने का अनुरोध किया।
एसोसिएशन की ओर से पेश वकील ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अधिकरणों के सदस्यों का कार्यकाल 8 सितंबर तक बढ़ाया था। अब यह अवधि खत्म होने वाली है। उन्होंने कहा कि इसके बाद एनजीटी की दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्र समेत तीन पीठों के कामकाज पर सीधा असर पड़ेगा।
वकील ने कहा कि NGT कानून के तहत एक सदस्य वाली पीठ का गठन नहीं किया जा सकता। इसलिए सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने और नई नियुक्तियां नहीं होने की स्थिति में संबंधित पीठों को काम रोकना पड़ेगा।
उन्होंने कहा,
"8 सितंबर से NGT की तीन पीठों को काम बंद करना पड़ेगा। इससे उनका पूरा कामकाज ठप हो जाएगा।"
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अधिकरणों से संबंधित नया कानून, ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2026 अब लागू हो चुका है। इस पर वकील ने कहा कि नए कानून के तहत नई नियुक्तियां तुरंत नहीं हो सकतीं और इसमें समय लगेगा।
वकील ने कहा,
"नई नियुक्तियां रातोंरात नहीं हो सकतीं। इसमें कुछ समय लगेगा। तब तक NGT की एक भी पीठ के कामकाज को प्रभावित होने से नहीं रोका जा सकेगा।"
बार एसोसिएशन ने आशंका जताई कि अगर 8 सितंबर तक कार्यकाल में और विस्तार नहीं हुआ या नई नियुक्तियां नहीं हुईं तो संबंधित क्षेत्रीय पीठ कई महीनों तक काम नहीं कर पाएंगी। इसका सीधा असर वहां लंबित मामलों पर पड़ेगा।
वकील ने कहा कि ऐसी स्थिति में केवल दिल्ली स्थित प्रधान पीठ ही काम करती रह जाएगी और क्षेत्रीय पीठों के सभी मामले दिल्ली में सुनने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि नई नियुक्तियां होने में तीन महीने या उससे अधिक समय भी लग सकता है।
उन्होंने कहा,
"तीन क्षेत्रीय पीठों का काम पूरी तरह रुक जाएगा और सभी मामलों की सुनवाई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ को करनी पड़ेगी।"
बार एसोसिएशन ने यह भी बताया कि दिल्ली स्थित प्रधान पीठ में भी दो पीठें हैं और सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने से उनमें से एक भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा एनजीटी की दक्षिणी पीठ, जो मद्रास में है का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया।
सुनवाई के दौरान नए अधिकरण कानून की धारा 24(3) का भी जिक्र हुआ। इसमें पहले से चल रही नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर प्रावधान किया गया। हालांकि, बार एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि मौजूदा स्थिति में इस प्रावधान का किस तरह इस्तेमाल होगा, यह स्पष्ट नहीं है और नई नियुक्तियां पूरी होने में समय लगेगा।
एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि या तो 8 सितंबर से पहले मामले की सुनवाई की जाए या फिर मौजूदा व्यवस्था को 15 सितंबर की निर्धारित सुनवाई तक जारी रखा जाए।
इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,
"तो हम मामले को 8 सितंबर से पहले सूचीबद्ध कर सकते हैं।"
इससे एनजीटी की क्षेत्रीय पीठों के कामकाज को लेकर तत्काल सुनवाई की संभावना बन गई।
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले को 8 सितंबर से पहले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर सकता है।


