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सरकारी मदद नहीं लेने वाले निजी स्कूलों को अपने प्रशासन के लिए अधिकतम स्वायत्तता दी जाए : दिल्ली हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
12 Nov 2019 4:15 AM GMT
सरकारी मदद नहीं लेने वाले निजी स्कूलों को अपने प्रशासन के लिए अधिकतम स्वायत्तता दी जाए : दिल्ली हाईकोर्ट
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दिल्ली ने फिर दोहराया है कि सरकारी मदद नहीं लेने वाले निजी स्कूलों को उनके प्रशासन में अधिकतम स्वायत्तता दी जानी चाहिए क्योंकि सरकारी हस्तक्षेप से इस तरह के संस्थानों की स्वतन्त्रता नजरअंदाज होती है।

वर्तमान मामले में अपीलकर्ता ने हाईकोर्ट के एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी कि अपीलकर्ता एस्स्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम (एसीपी) या मॉडिफाइड एस्स्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम (एमएसीपी) पाने के योग्य नहीं है।

यह था मामला

अपीलकर्ता ने 24 साल की सेवा पूरी कर लेने पर एसीपी योजना को लागू करने का आदेश देने की मांग की थी और इस तरह उनको मिलने वाले अतिरिक्त वेतन का भी भुगतान किया जाने की मांग की।

अपीलकर्ता ने यह भी कहा कि 35 वर्ष की सेवा अवधि के दौरान उसे कभी भी प्रोन्नति नहीं मिली। वह एक ही पद पर इस पूरी अवधि तक काम करती रही।

प्रतिवादी ने अपनी दलील में कहा कि अपीलकर्ता एक ऐसे निजी स्कूल में काम करती है जिसको सरकार से मदद नहीं मिलती है, वह अपना फंड खुद जुटाता है और प्रोमोशन के बाद उसको तीन वित्तीय अपग्रेडेशन दिया गया था।

यह भी कहा गया कि निजी और सरकार से कोई मदद नहीं लेने वाले स्कूल के कर्मचारियों को एमएसीपी योजना का लाभ देने के बारे में किसी भी निर्देश के अभाव में इस तरह की मदद देना पूरी तरह इस तरह के स्कूलों के प्रबंधन की इच्छा पर निर्भर करता है।

प्रतिवादी ने यह दलील भी दी कि सरकारी सहायता नहीं लेने वाले निजी स्कूलों को एमएसीपी योजना को लागू करने के बारे में कोई भी निर्देश नहीं दिया गया है और इसके लिए जरूरी फंड इकट्ठा करने के लिए किसी भी तरह का दिशानिर्देश नहीं दिया गया है, इसलिए इस सन्दर्भ में दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 10 पर इसके लिए भरोसा नहीं किया जा सकता है।

अदालत ने प्रतिवादी की दलील से सहमति जताई और कहा कि इस सन्दर्भ में दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 10 का लाभ नहीं उठाया जा सकता है।

न्यायमूर्ति सिस्तानी और ज्योति सिंह की खंडपीठ ने इस बारे में टीएमए पाई फाउंडेशन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया -

"…निजी गैर-सहायता प्राप्त और सरकारी स्कूलों के प्रशासन में अंतर होना ही है। सरकारी स्कूलों के प्रशासन में प्रवेश और फीस के निर्धारण में सरकार की ज्यादा चलती है जबकि निजी गैर-सहायताप्राप्त स्कूलों को दैनिक प्रशासन के क्षेत्र में ज्यादा स्वायत्तता मिलनी चाहिए…।"

इसलिए, अदालत ने इस मामले में एकल जज की पीठ के फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया और कहा कि अपीलकर्ता एसीपी या एमएसीपी योजना के तहत किसी भी राहत की हकदार नहीं है।



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