मणिपुर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से CBI और NIA के मामलों के लिए अलग कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा
Amir Ahmad
10 Aug 2026 2:47 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वह मणिपुर हिंसा से जुड़े उन मामलों की सुनवाई के लिए अलग कोर्ट बनाने पर विचार करें, जिनकी जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) कर रही हैं।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह अनुरोध तब किया, जब वे मणिपुर संकट के दौरान हुई यौन हिंसा की घटनाओं की जांच और ट्रायल से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इन मामलों के ट्रायल को मणिपुर से असम (गुवाहाटी हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में) ट्रांसफर किया।
सोमवार को दायर स्टेटस रिपोर्ट पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि CBI के मामलों में अभी भी बड़ी संख्या में गवाहों से पूछताछ होनी बाकी है और कहा कि डेडिकेटेड कोर्ट (खास कोर्ट) से ट्रायल तेज़ी से हो सकते हैं।
CBI की स्टेटस रिपोर्ट से पता चला कि कई मामलों में चार्जशीट दायर की जा चुकी हैं और कुल 904 गवाहों का ज़िक्र किया गया। इनमें से 891 गवाहों से अभी पूछताछ होनी बाकी है।
कोर्ट ने कहा,
"जिन गवाहों से पूछताछ होनी है, उनकी कुल संख्या को देखते हुए हम गुवाहाटी हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से अनुरोध करते हैं कि वे CBI/NIA कोर्ट को सिर्फ़ मणिपुर से जुड़े मामलों को देखने की अनुमति देने की संभावना पर विचार करें। बाकी मामलों को किसी दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए।"
कोर्ट ने आगे कहा कि चीफ जस्टिस दो अलग-अलग खास कोर्ट बनाने पर भी विचार कर सकते हैं, एक CBI के मामलों के लिए और दूसरी NIA के मामलों के लिए।
कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को इस प्रस्ताव की संभावना के बारे में स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि CBI मणिपुर हिंसा से जुड़े 31 मामलों की जांच कर रही है। 27 मामलों में फाइनल रिपोर्ट दायर की जा चुकी हैं, जिनमें पांच क्लोज़र रिपोर्ट (मामला बंद करने की रिपोर्ट) शामिल हैं। बाकी 22 मामलों में जिनमें चार्जशीट दायर की गई 20 मामलों में संज्ञान लिया जा चुका है जबकि दो मामलों में यह प्रक्रिया अभी लंबित है।
ASG ने बताया कि इनमें से सिर्फ़ एक मामले की सुनवाई मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है जबकि बाकी मामलों की सुनवाई सेशन कोर्ट द्वारा की जानी है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में जांच चल रही है और कई मामले अब ट्रायल के लिए तैयार हैं।
NIA के बारे में कोर्ट को बताया गया कि एजेंसी को 30 मामले सौंपे गए। 15 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि बाकी 15 मामलों में जांच चल रही है। जिन मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, उनमें से सात में आरोप तय किए जा चुके हैं।
कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने बताया कि जिन मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, उनके लिए आवंटित सेशन केस नंबर की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
इस सुझाव को मानते हुए कोर्ट ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को सेशन ट्रायल नंबर और अन्य संबंधित जानकारी इकट्ठा करने और उन्हें रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इससे संबंधित पक्षों को रिकॉर्ड देखने में मदद मिलेगी और ट्रायल में आसानी होगी।
कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व DGP दत्तात्रेय पडसलगीकर द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर भी ध्यान दिया, जो कोर्ट के आदेश के अनुसार CBI जांच की निगरानी कर रहे हैं। रिपोर्ट में जुलाई 2026 की कई घटनाओं का जिक्र किया गया, जिनमें कुछ समुदाय समूहों द्वारा सड़क जाम करना, CRPF जवानों पर हमले, असम राइफल्स के जवानों पर हमले, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान और NRC को लेकर विरोध प्रदर्शन शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अधिकारी असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार करने में सफल रहे।
इस बात पर जोर देते हुए कि कानून-व्यवस्था की संवेदनशील स्थिति जांच में बाधा नहीं बननी चाहिए, कोर्ट ने निर्देश दिया कि SIT, CBI और NIA अपनी चल रही जांच जारी रखें।
कोर्ट ने निर्देश दिया,
"कानून-व्यवस्था की संवेदनशील स्थिति के बावजूद, SIT, CBI और NIA अपनी चल रही जांच जारी रखेंगी।"
साथ ही कहा कि मणिपुर राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को लंबित जांच को उनके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए पूरा सहयोग सुनिश्चित करना चाहिए।
कोर्ट ने जांच एजेंसियों और अन्य संबंधित अधिकारियों को सुनवाई की अगली तारीख से पहले नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की जांच और ट्रायल में देरी पर चिंता जताई और रोज़ाना ट्रायल करने के लिए विशेष अदालतें गठित करने का प्रस्ताव दिया।
अंग्रेजी में पढ़ने के लिए क्लिक करें


