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मद्रास हाईकोर्ट ने ईसाई शैक्षणिक संस्थान पर की गई टिप्पणी को अपने फैसले से हटाया

LiveLaw News Network
21 Aug 2019 5:50 AM GMT
मद्रास हाईकोर्ट ने ईसाई शैक्षणिक संस्थान पर की गई टिप्पणी को अपने फैसले से हटाया
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मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एस वैद्यनाथन ने अपने एक फैसले में ईसाई शैक्षणिक संस्थानों पर की गई टिप्पणी वापस ले ली है। एक फैसले में जस्टिस वैद्यनाथन ने ईसाई को-एजुकेशन स्टडी सेंटर को बच्चों के लिए असुरक्षित बताया था। मद्रास हाईकोर्ट के फैसले से उक्त टिप्पणी को हटा दिया गया है।

जस्टिस वैद्यनाथन ने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज (एमसीसी) के पूर्व फैक्लटी मेंबर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही थी। पूर्व फैक्लटी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे जिसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया था। इस फेक्लटी मेंबर ने खुद को जारी कारण बताओ नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस वैद्यनाथन ने कहा था, ''छात्रों के माता-पिता, खासकर छात्राओं के माता-पिता के मन में यह सामान्य भावना है कि ईसाई संस्थानों में को-एजुकेशन उनके बच्चों के भविष्य के लिए बेहद असुरक्षित हैं। ईसाई धर्म के संस्थानों में अच्छी शिक्षा दी जाती है लेकिन फिर भी नैतिकता का सवाल लाख रुपए का बना रहेगा।''

इस मामले को लेकर कॉलेज की ओर से नियुक्त वकील ने जस्टिस वैद्यनाथन के फैसले से पैराग्राफ 32 को 'अनावश्यक' बताते हुए हटाने की मांग की थी। जस्टिस वैद्यनाथन की उक्त टिप्पणी की तमिलनाडु बिशप काउंसिल सहित ईसाई समाज ने आलोचना की थी। न्यायमूर्ति वैद्यनाथन ने महिला-सुरक्षा कानूनों के कथित दुरुपयोग के संबंध में भी टिप्पणियां की थीं। हालांकि ये फैसले का हिस्सा रहेंगे।

इन टिप्पणियों को व्यापक आलोचना हुई थी और वकीलों के एक वर्ग ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इन टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी। तमिलनाडु बिशप काउंसिल सहित कई ईसाई निकायों ने टिप्पणियों को पर चिंता व्यक्त की थी।


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