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लाइव स्ट्रीमिंग: सीजेआई ने संदर्भ से हटकर क्लिप के सर्कुलेट होने पर चिंता व्यक्त की कहा, संस्थान की पवित्रता बनी रहनी चाहिए

Sharafat
25 Nov 2022 9:28 AM GMT
लाइव स्ट्रीमिंग: सीजेआई ने संदर्भ से हटकर क्लिप के सर्कुलेट होने पर चिंता व्यक्त की कहा, संस्थान की पवित्रता बनी रहनी चाहिए
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए एक स्वतंत्र प्लेटफार्म बनाने पर विचार कर रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पूरी प्रक्रिया को संस्थागत बनाया जा सके।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने सार्वजनिक और संवैधानिक महत्व वाले मामलों की लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से कहा,

"ज्यादातर हाईकोर्ट इसे YouTube पर कर रहे हैं। हमने अब सोचा कि लाइव-स्ट्रीमिंग करने के लिए हमारे पास अपना खुद का प्लेटफार्म हो सकता है ... हम एक संस्थागत प्रक्रिया चाहते हैं। महामारी के दौरान, हमें इसे एडहॉक तरीके से करना था। अब हम जो करते हैं वह आने वाली पीढ़ी के लिए होगा। यह एक जटिल और बड़ा देश है जहां हमें सभी के हितों का भी ध्यान रखना होगा।"

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के YouTube चैनल के माध्यम से लाइव-स्ट्रीम की जाती है।

सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' जारी करना चाहती है और लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए खुद का प्लेटफॉर्म बनाने के लिए एक एजेंसी बनाना चाहती है।

सुनवाई के दौरान, सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने भी न्यायालय से वीसी लिंक तक आसान पहुंच प्रदान करने का आग्रह किया।

"कई हाईकोर्ट काज लिस्ट पर ही लिंक डाल रहे हैं।"

सीजेआई ने रजिस्ट्री से इस सुझाव की जांच करने को कहा है।

जयसिंह ने यह भी मांग की कि अदालत को सुनवाई के टेप मेंटेन करने चाहिए। हालांकि, सीजेआई ने जवाब दिया कि इसकी लागत बहुत अधिक है।

"यदि आपको भौतिक रूप से ट्रांसक्रिप्ट बनाना है तो हमें बड़ी संख्या में लोगों की आवश्यकता है ... ट्रांसक्रिप्ट सेवाओं के लिए, ट्रांसक्रिप्ट के लिए लागत बहुत अधिक है। अब इसका उपयोग कुछ मध्यस्थता मामलों में किया जा रहा है।"

सीजेआई ने सोशल मीडिया में अदालती कार्यवाही से छोटी क्लिप के प्रसार पर भी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा,

"अक्सर क्लिप को संदर्भ से बाहर कर दिया जाता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इस प्रक्रिया में संस्था की पवित्रता बनी रहे।"

उन्होंने कहा कि एक बार नियमित प्लेटफॉर्म चालू हो जाने के बाद, केवल लाइव वीडियो स्ट्रीम किए जाएंगे और केवल वास्तविक व्यक्तियों को ही अनुरोध करने पर रिकॉर्ड करने की पहुंच दी जाएगी।

सीजेआई ने कहा,

"कार्यवाही के बाद एक्सेस केवल बोनाफाइड व्यक्तियों, जैसे शोधकर्ता, वादी आदि को दी जा सकता है।"

जयसिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले में परिकल्पना की गई थी कि लाइव-स्ट्रीम फुटेज का कॉपीराइट कोर्ट के पास रहेगा। सीजेआई ने कहा कि जयसिंह सुप्रीम कोर्ट के जनरल सेक्रेटरी को अपने सुझाव दे सकती हैं, जबकि लाइव-स्ट्रीमिंग के नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी "राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे" के लिए अपने झुकाव का संकेत दिया था ताकि हाईकोर्ट और अन्य भी इसका उपयोग कर सकें। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठों के समक्ष सुनवाई की लाइव-स्ट्रीमिंग शुरू करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया।

लाइव-स्ट्रीमिंग को लाखों लोगों के वीडियो देखने के साथ भारी सार्वजनिक प्रतिक्रिया मिली।

पिछले महीने, अदालत ने एक याचिका पर नोटिस जारी किया था जिसमें YouTube में अपलोड किए गए लाइव-स्ट्रीम वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट के कॉपीराइट को बनाए रखने के निर्देश मांगे गए थे।

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