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लखमीपुर खीरी केस : सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन को घटना की जांच की निगरानी के लिए नियुक्त किया

LiveLaw News Network
17 Nov 2021 7:34 AM GMT
लखमीपुर खीरी केस : सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन को घटना की जांच की निगरानी के लिए नियुक्त किया
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन को लखमीपुर खीरी हिंसा घटना की जांच की निगरानी के लिए नियुक्त किया। लखमीपुर खीरी में 3 अक्टूबर की घटना में 4 किसानों सहित 8 लोगों की जान गई थी। कथित रूप से यह दावा किया गया था कि केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा के काफिले के वाहनों से किसानों को कुचल दिया गया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति जांच के परिणाम में "निष्पक्षता, पारदर्शिता और पूर्ण निष्पक्षता सुनिश्चित करने" के लिए की जाती है।

पीठ ने यह भी कहा कि उसने मामले की जांच के लिए यूपी पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल में तीन आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया है।

सीजेआई ने कहा,

"श्री शिरोडकर, श्री दीपिंदर सिंह और पद्मजा चौहान, ये तीन पुलिस अधिकारी एसआईटी में होंगे और इसे पुनर्गठित किया जाएगा।"

सीजेआई ने कहा कि इस संबंध में विस्तृत आदेश पारित कर बाद में अपलोड किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश राज्य ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए सहमत है, जिसके बाद आज निर्देश जारी किए गए हैं।

पीठ ने तब यह भी देखा था कि मामले की जांच के लिए यूपी पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल को अपग्रेड करने की जरूरत है, क्योंकि इसमें ज्यादातर लखीमपुर खीरी क्षेत्र के सब इंस्पेक्टर ग्रेड के अधिकारी होते हैं। इसलिए यूपी राज्य को एसआईटी में शामिल करने के लिए यूपी कैडर के उन आईपीएस अधिकारियों के नाम प्रसारित करने के लिए कहा गया, जो यूपी से नहीं हैं।

8 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह जांच की निगरानी के लिए दूसरे राज्य के उच्च न्यायालय से एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त करने का प्रस्ताव कर रहा है।

पृष्ठभूमि

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ दो अधिवक्ताओं द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें लखीमपुर खीरी की हालिया हिंसक घटना की समयबद्ध सीबीआई जांच की मांग की गई है।

26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य को लखीमपुर खीरी हिंसा के गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यूपी राज्य को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया था कि प्रासंगिक गवाहों के बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज किए जाएं। यदि मजिस्ट्रेट की अनुपलब्धता के कारण गवाहों के बयान दर्ज करने में कोई कठिनाई होती है तो पीठ ने संबंधित जिला न्यायाधीश को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि बयान निकटतम उपलब्ध मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए जा सकें।

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