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कर्नाटक में अयोग्य करार विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस शांतनागौदर ने सुनवाई से खुद को अलग किया

LiveLaw News Network
17 Sep 2019 7:19 AM GMT
कर्नाटक में अयोग्य करार विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस शांतनागौदर ने सुनवाई से खुद को अलग किया
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कर्नाटक में अयोग्य करार दिए गए 17 बागी विधायकों की याचिका पर फिलहाल सुनवाई टल गई है। मंगलवार को जस्टिस एम एम शांतनागौदर ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अब मामले को CJI के पास भेजा गया है ताकि इसके लिए दूसरी पीठ का गठन किया जा सके।

मंगलवार को जैसे ही जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस एम एम शांतनागौदर और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ मामले की सुनवाई के लिए बैठी तो जस्टिस शांतनागौदर ने कहा कि वो इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर रहे हैं। अब CJI रंजन गोगोई इस संबंध में नई पीठ का गठन करेंगे।

17 अयोग्य विधायकों का यह है मामला

गौरतलब है कि कर्नाटक के 17 अयोग्य विधायकों ने तत्कालीन स्पीकर के रमेश कुमार के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं जिसमें उनके इस्तीफे को खारिज कर दिया था और उन्हें 15 वीं कर्नाटक विधानसभा के कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।

विधायकों को येदियुरप्पा मंत्रालय में शामिल नहीं किया जा सका क्योंकि उन्हें अयोग्य घोषित किया गया था। विधायकों ने अयोग्य ठहराए जाने को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है क्योंकि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि विश्वास मत के दौरान सदन में उपस्थित होने के लिए बाध्य करने के लिए स्पीकर द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने अध्यक्ष पर 10 वीं अनुसूची के प्रावधानों को तोड़-मरोड़कर

अयोग्य ठहराने को गलत बताया और यह भी कहा है कि अनिवार्य नोटिस अवधि के बिना निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने संविधान की व्याख्या के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की।

बागी विधायकों के ये हैं तर्क

अपनी याचिका में बागी विधायकों ने यह भी तर्क दिया है कि उनमें से अधिकांश ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था और उनके इस्तीफे पर फैसला करने के बजाए स्पीकर ने अवैध रूप से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जबकि स्पीकर को पहले इस्तीफों पर फैसला करना चाहिए था।

यह भी तर्क दिया गया है कि स्पीकर ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन किया है क्योंकि अयोग्यता से पहले कोई सुनवाई नहीं की गई। इन अयोग्य विधायकों ने कहा है कि 28 जुलाई को पारित स्पीकर के आदेश "पूरी तरह से अवैध, मनमानी और दुर्भावनापूर्ण" हैं क्योंकि उन्होंने मनमाने ढंग से उनके स्वैच्छिक इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया था।

उन्होंने कहा है कि उन्होंने 6 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था लेकिन स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कांग्रेस पार्टी द्वारा 10 जुलाई को "पूरी तरह से गलत" याचिका के आधार पर उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया।

वहीं तीन JDS सदस्यों - एएच विश्वनाथ, के गोपालैया और केसी नारायगौड़ा ने उन्हें अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर के आदेश की वैधता पर सवाल उठाते हुए अपनी अलग रिट याचिका दायर की है और स्पीकर के आदेश को रद्द करने की मांग की है।

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