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जस्टिस कृष्ण मुरारी, रवींद्र भट, रामसुब्रमण्यन और हृषिकेश रॉय की सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति, नोटिफिकेशन पढ़ें

LiveLaw News Network
18 Sep 2019 4:54 PM GMT
जस्टिस कृष्ण मुरारी, रवींद्र भट, रामसुब्रमण्यन और हृषिकेश रॉय की सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति, नोटिफिकेशन पढ़ें
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राष्ट्रपति ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में उच्च न्यायालयों के चार मुख्य न्यायाधीशों की पदोन्नति को अधिसूचित किया है।

इन न्यायाधीशों के नाम इस प्रकार हैं :

जस्टिस कृष्ण मुरारी, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।

जस्टिस एस रवींद्र भट, राजस्थान के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम, हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

जस्टिस हृषिकेश रॉय, केरल के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।

CJI रंजन गोगोई, जस्टिस बोबडे, रामाना, अरुण मिश्रा और आर एफ नरीमन के कॉलेजियम ने 28 अगस्त को उन्हें "उच्च न्यायालय के अन्य मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ उप न्यायाधीशों से अधिक वांछनीय और उपयुक्त" पाते हुए उनके नाम की सिफारिश की थी। कॉलेजियम ने कहा कि उन्होंने सभी न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता को ध्यान में रखा है और सभी उच्च न्यायालयों को उचित प्रतिनिधित्व देने की वांछनीयता को ध्यान में रखा है।

जस्टिस कृष्ण मुरारी

जस्टिस कृष्ण मुरारी इलाहाबाद से हैं। वह 1981 में बार में शामिल हुए और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस की। वह जनवरी 2004 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। उन्होंने जून 2018 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला। वह अखिल भारतीय आधार पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता में सीरियल नंबर 5 पर हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उनके पास 8 जुलाई 2023 तक का कार्यकाल होगा।

जस्टिस रवींद्र भट

न्यायमूर्ति रवींद्र भट 2004 से दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। उन्हें पिछले अप्रैल में राजस्थान उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। वह मैसूर, कर्नाटक से हैं और उनकी कानून की शिक्षा दिल्ली के कैंपस लॉ सेंटर से हुई। उन्होंने 1982 में एक वकील के रूप में दाखिला लिया और दिल्ली उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू की। वे जुलाई 2004 में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने।

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में वह कई उल्लेखनीय निर्णयों का हिस्सा थे, जैसे कि इस निर्णय की घोषणा कि आरटीआई CJI के कार्यालय में लागू होगी आदि।

वह अखिल भारतीय आधार पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता में सीरियल नंबर 12 पर हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उनके पास 21 अक्टूबर, 2023 तक का कार्यकाल होगा।

जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन

जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम चेन्नई, तमिलनाडु के निवासी हैं। मद्रास लॉ कॉलेज से कानून में स्नातक करने के बाद उन्होंने 16 फरवरी, 1983 को बार के सदस्य के रूप में दाखिला लिया। चेन्नई में कानून के 23 वर्षों के अभ्यास के बाद उन्हें जुलाई 2006 में मद्रास उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया।

27 अप्रैल, 2016 को उनका तबादला तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों के लिए हैदराबाद में उच्च न्यायालय में कर दिया गया। आंध्र प्रदेश राज्य के लिए एक अलग उच्च न्यायालय के गठन और विभाजन के बाद जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन हैदराबाद में तेलंगाना के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने रहे। उन्होंने 22 जून, 2019 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

वह अखिल भारतीय आधार पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता में सीरियल नंबर 4 पर हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उनके पास 30 जून, 2023 तक का कार्यकाल होगा।

जस्टिस हृषिकेश रॉय

न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय को असम से हटाकर अक्टूबर 2006 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। 2018 में, उन्हें केरल के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्होंने 1982 में कैम्पस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एल.एल.बी.की। उन्होंने जस्टिस रवींद्र भट के साथ स्नातक किया।

शुरुआत में उन्हें बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के तहत नामांकित किया गया और उसके बाद गुवाहाटी स्थानांतरित कर दिया गया। उन्हें 21 दिसंबर 2004 को गुवाहाटी उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उनके पास 1 फरवरी 2025 तक का कार्यकाल होगा।



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