हाइकोर्टों में प्रशासनिक निरंतरता के लिए नई नीति: रिटायरमेंट से पहले पदभार संभालने की तैयारी
Amir Ahmad
27 Feb 2026 1:32 PM IST

सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने हाइकोर्टों में प्रशासनिक निरंतरता और कार्यकुशलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई नीति अपनाई है। 26 फरवरी, 2026 को हुई बैठक के बाद जारी वक्तव्य में कहा गया कि अब किसी हाइकोर्ट के भावी चीफ जस्टिस को पद रिक्त होने से लगभग दो माह पूर्व ही ट्रांसफर किया जा सकेगा।
कॉलेजियम के अनुसार यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि नामित जस्टिस संबंधित हाइकोर्ट के प्रशासनिक कार्यों और व्यवस्था से पहले ही परिचित हो सकें और वर्तमान चीफ जस्टिस के रिटायर होते ही तत्काल कार्यभार संभाल सकें। वक्तव्य में कहा गया कि यह कदम न्याय प्रशासन की दक्षता और गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उठाया गया।
जस्टिस लीसा गिल का आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट में ट्रांसफर
पंजाब एंड हरियाणा की जस्टिस लीसा गिल को नई नीति के तहत आन्ध्र प्रदेश ट्रांसफर करने की संस्तुति की गई। उन्हें आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की गई, जो पद रिक्त होने की तिथि से प्रभावी होगी।
कॉलेजियम ने स्पष्ट किया कि अग्रिम ट्रांसफर से उन्हें आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलेगा, जिससे वे पदभार ग्रहण करते ही सुचारु रूप से दायित्व निभा सकें।
मद्रास हाइकोर्ट के लिए नई सिफारिश
इसके अतिरिक्त कॉलेजियम ने केरल हाइकोर्ट के जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी (मूल हाइकोर्ट: मध्य प्रदेश) को मद्रास हाईकोर्ट का अगला चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की।
यह सिफारिश मद्रास हाइकोर्ट के वर्तमान चीफ जस्टिस के 5 मार्च, 2026 को रिटायर होने के मद्देनजर की गई।

