जस्टिस गौतम पटेल के परिवार की सुरक्षा को लेकर सक्रिय हुए CJI, लंदन में भारतीय उच्चायुक्त से की मुलाकात
Amir Ahmad
11 Jun 2026 2:49 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गौतम पटेल और उनके परिवार को मिल रही धमकियों तथा लंदन में उनकी बेटी पर हुए हमले के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने मामले में हस्तक्षेप किया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान चीफ जस्टिस ने लंदन में भारतीय उच्चायुक्त पी. कुमारन से मुलाकात कर जस्टिस पटेल की बेटी और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा।
बॉम्बे हाईकोर्ट प्रशासन से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि CJI के हस्तक्षेप के बाद भारतीय उच्चायोग ने मामले की स्थिति से उन्हें अवगत कराया। इसके बाद स्थानीय पुलिस एजेंसी हर्टफोर्डशायर कांस्टेबुलरी द्वारा जस्टिस पटेल की बेटी और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की गई।
सूत्रों के अनुसार,
"चीफ जस्टिस के हस्तक्षेप के बाद भारतीय उच्चायोग ने मामले में सक्रिय भूमिका निभाई और अब परिवार को उचित सुरक्षा और संरक्षण उपलब्ध कराया गया।"
इधर महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक और मुंबई पुलिस आयुक्त ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस जस्टिस रवींद्र घुगे को घटना तथा मुंबई में दर्ज गैर-संज्ञेय शिकायत के संबंध में जानकारी दी।
बताया जाता है कि जस्टिस गौतम पटेल और उनका परिवार पिछले लगभग दस महीनों से धमकियों का सामना कर रहा है। ये धमकियां उस फैसले के बाद शुरू हुईं, जो उन्होंने 23 अप्रैल 2024 को दिया था। इस फैसले में उन्होंने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय का वैध उत्तराधिकारी और 53वां दाई-अल-मुतलक माना।
रिपोर्टों के अनुसार, जस्टिस पटेल की पत्नी को मुंबई में और उनकी बेटी अदिति पटेल को लंदन में धमकी भरे पत्र मिले। इन पत्रों में कथित तौर पर जस्टिस पटेल से अपने फैसले को एक वीडियो जारी कर वापस लेने की मांग की गई। ऐसा न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। इसी दौरान लंदन में उनकी बेटी पर एक नकाबपोश व्यक्ति द्वारा हमला किए जाने की भी सूचना है।
इस बीच, बॉम्बे बार एसोसिएशन, एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया और बॉम्बे इन्कॉरपोरेटेड लॉ सोसाइटी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर जस्टिस पटेल और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
याचिका में कहा गया,
"ये हमले और धमकियां न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं। साथ ही संबंधित फैसले के खिलाफ लंबित अपील की सुनवाई कर रहे जजों को भी प्रभावित करने का प्रयास प्रतीत होते हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की आशंका पैदा होती है।"
याचिका में महाराष्ट्र पुलिस, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों को शामिल कर एक विशेष जांच दल गठित करने की मांग भी की गई।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जजों को अक्सर खतरनाक अपराधियों, आतंकवादियों और प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़े मामलों की सुनवाई करनी पड़ती है। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए आवश्यक है।
मामले का उल्लेख एक्टिंग चीफ जस्टिस जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड़ की खंडपीठ के समक्ष किया गया, जिसने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
इससे पहले बॉम्बे बार एसोसिएशन ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी जज या उसके परिवार को न्यायिक कार्यों के कारण धमकाना, प्रताड़ित करना या निशाना बनाना बेहद गंभीर मामला है और इस पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल तथा कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

