छात्र आंदोलन में खाना खिलाने वाले मुहम्मद जुनैद पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, पुलिस पर लगाया परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप
Amir Ahmad
28 July 2026 12:01 PM IST

हालिया छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के लिए खाना उपलब्ध कराने वाले वॉलिंटियर जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया, धमकाया और उनके परिवार के सदस्यों के साथ भी बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए उत्पीड़न किया।
जुनैद मलिक ने अपनी अर्जी में कहा कि 24 जुलाई की आधी रात वह रेबीज का टीका लगवाकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल से लौट रहे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों ने उन्हें रास्ते से उठा लिया और करीब पांच से छह घंटे तक एक वाहन में बैठाकर रखा।
याचिका के अनुसार इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने उन्हें धमकाया और डराने का प्रयास किया। उनका मोबाइल फोन जबरन ले लिया गया और उसे खुलवाकर उसकी जांच की गई। उनसे पूछा गया कि उन्हें आर्थिक सहायता कौन दे रहा है और भोजन वितरण के लिए धन कहां से आ रहा है।
मलिक का आरोप है कि करीब पांच से छह घंटे बाद उन्हें देहरादून मार्ग पर एक सुनसान स्थान पर छोड़ दिया गया, जहां से उन्होंने टैक्सी लेकर दिल्ली वापसी की।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि गाजियाबाद पुलिस ने उनके पिता को हिरासत में लिया और उनके घर पर छापा मारा। इसके अलावा, पुलिस मेरठ स्थित उनकी विवाहित बहन के घर भी पहुंची और वहां से उनके ससुर तथा देवर को भी अपने साथ ले गई। बाद में सभी को छोड़ दिया गया।
मलिक ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके घर का सामान भी क्षतिग्रस्त किया गया।
याचिका में कहा गया कि यह पूरी कार्रवाई बिना किसी लिखित दस्तावेज और कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई।
सुप्रीम कोर्ट से मलिक ने मांग की कि पुलिस को उनके परिवार के खिलाफ किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई से रोका जाए। साथ ही यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए कि यदि कोई जांच की जाती है तो वह पूरी तरह कानून के अनुसार ही हो।
यह अर्जी राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा की उस लंबित रिट याचिका में दायर की गई, जिसमें छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।


