झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी: CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकार और JPSC को नोटिस

Amir Ahmad

24 Aug 2026 1:20 PM IST

  • झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी: CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकार और JPSC को नोटिस

    झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को झारखंड सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को नोटिस जारी किया। याचिका में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की मांग की गई।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सोशल एक्टिविस्ट हरीशरण देवगन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की।

    याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र एक महीने से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला किया लेकिन हाईकोर्ट ने तत्काल उस फैसले पर रोक लगाई। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार अप्रत्यक्ष रूप से परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाले पक्ष का समर्थन कर रही है।

    सीनियर एडवोकेट ने जांच CBI को सौंपने अथवा सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जस्टिस की निगरानी में जांच कराने का आग्रह किया।

    इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि किसी पूर्व जस्टिस से जांच कराने का काम नहीं कराया जा सकता।

    सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने यह भी पूछा कि क्या न्यायिक सेवा की भर्ती परीक्षाएं भी राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाती हैं।

    इस पर याचिकाकर्ता की ओर से हां में जवाब दिया गया।

    एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर याचिका में राज्य स्तर पर चल रही जांच को CBI को सौंपने की मांग की गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि सार्वजनिक अधिकारियों और परीक्षा एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र जांच एजेंसी आवश्यक है।

    याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने मात्र से कथित व्यवस्थित भ्रष्टाचार की वास्तविकता सामने लाने की आवश्यकता समाप्त नहीं होती। याचिकाकर्ता ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान और जवाबदेही तय करने के लिए स्वतंत्र जांच की मांग की।

    याचिका में भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की भी मांग की गई। इनमें मूल और अभ्यर्थियों के पास मौजूद OMR की कार्बन प्रतियां, सीसीटीवी फुटेज और सर्वर की जांच से संबंधित अभिलेख शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन साक्ष्यों को सुरक्षित रखना जरूरी है ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ या साक्ष्य नष्ट किए जाने की संभावना को रोका जा सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने मामले में झारखंड सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग से जवाब मांगा।

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