सहयोग पोर्टल विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने X, कुणाल कामरा समेत सभी याचिकाओं पर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक

Amir Ahmad

7 Aug 2026 3:31 PM IST

  • सहयोग पोर्टल विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने X, कुणाल कामरा समेत सभी याचिकाओं पर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने 'सहयोग पोर्टल' और ऑनलाइन कंटेंट हटाने से जुड़े केंद्र सरकार के अधिकारों को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कर्नाटक और बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित कार्यवाहियों पर अंतरिम रोक लगाई।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार की ट्रांसफर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। केंद्र ने इन सभी मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है।

    पीठ ने नोटिस जारी करते हुए 10 अगस्त तक जवाब मांगा और कहा,

    "इस बीच, संबंधित हाईकोर्टों में लंबित इन मामलों की कार्यवाही स्थगित रहेगी।"

    जिन मामलों की कार्यवाही पर रोक लगाई गई, उनमें कर्नाटक हाईकोर्ट में एक्स कॉर्प (पूर्व में ट्विटर) और डिजीपब न्यूज़ फाउंडेशन की याचिकाएं शामिल हैं। इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट में कुणाल कामरा और सीनियर एडवोकेट हरेश जगतियानी द्वारा दायर याचिकाओं की कार्यवाही भी फिलहाल रोक दी गई।

    इन सभी याचिकाओं में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) की धारा 79(3)(ख) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(1)(घ) के तहत ऑनलाइन सामग्री हटाने की व्यवस्था और 'सहयोग पोर्टल' की वैधानिकता को चुनौती दी गई।

    सबसे पहले एक्स कॉर्प ने कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए सामग्री हटाने की व्यवस्था को चुनौती दी थी। हालांकि, सितंबर 2025 में जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सहयोग पोर्टल की वैधता को बरकरार रखते हुए एक्स कॉर्प की याचिका खारिज कर दी थी।

    इसके बाद फरवरी 2026 में कुणाल कामरा और सीनियर एडवोकेट हरेश जगतियानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर सहयोग पोर्टल तथा नियम 3(1)(घ) में वर्ष 2025 में किए गए संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी।

    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था IT Act की धारा 69ए के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों को दरकिनार करते हुए सामग्री हटाने का समानांतर तंत्र तैयार करती है। उनका आरोप है कि सहयोग पोर्टल के माध्यम से किसी यूजर्स को पूर्व सूचना दिए बिना ऑनलाइन सामग्री हटाई जा सकती है, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है।

    याचिकाओं में यह भी कहा गया कि नियम 3(1)(घ) और सहयोग पोर्टल, सुप्रीम कोर्ट के श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015) फैसले की भावना के भी विपरीत हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह व्यवस्था धारा 69ए के अंतर्गत उपलब्ध कानूनी सुरक्षा उपायों के बिना सामग्री हटाने की समानांतर प्रक्रिया बनाती है, इसलिए यह मनमानी, अवैध और IT Act के विपरीत है।

    अब केंद्र सरकार ने इन चारों मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की, ताकि सभी संबंधित कानूनी प्रश्नों पर एकसाथ निर्णय किया जा सके।

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