मानसिक स्वास्थ्य के आधार पर IIT खड़गपुर के स्टूडेंट का IIT रुड़की में तबादला मंजूर, सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल
Amir Ahmad
30 July 2026 3:42 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे IIT खड़गपुर के स्टूडेंट को मेडिकल आधार पर IIT रुड़की में ट्रांसफर की अनुमति दी। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया, ताकि मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने IIT खड़गपुर को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर स्टूडेंट को ट्रांसफर और प्रवासन प्रमाणपत्र सहित सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए, ताकि वह आईआईटी रुड़की में प्रवेश ले सके।
अदालत ने कहा कि छात्र चंडीगढ़ में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपचार करा रहा है और नियमित मेडिकल देखरेख की आवश्यकता है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली को स्टूडेंट की मेडिकल जांच करने का निर्देश दिया। साथ ही IIT रुड़की से कहा था कि मामले के अंतिम निर्णय तक एक सीट खाली रखी जाए।
सुनवाई के दौरान स्टूडेंट की ओर से सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने दलील दी कि स्टूडेंट का उपचार लगातार जारी है और उसे नियमित दवाएं लेनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट का इलाज पोस्ट-ग्रेजुएट आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (PGIMER), चंडीगढ़ में चल रहा है, इसलिए ट्रांसफर आवश्यक है।
IIT रुड़की की ओर से वकील शैवाल श्रीवास्तव ने कहा कि संस्थान में स्थानांतरण संबंधी कोई नियम नहीं है और प्रत्येक IIT अपने-अपने सीनेट के नियमों के अनुसार कार्य करता है।
इस पर जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा,
"तब हम नियमों का उल्लेख नहीं करेंगे, केवल अनुच्छेद 142 के तहत आदेश देंगे।"
IIT रुड़की की ओर से यह भी कहा गया कि AIIMS की रिपोर्ट में स्टूडेंट के अवसाद से पीड़ित होने और दवा लेने का उल्लेख है, लेकिन उसमें यह नहीं कहा गया कि उसकी स्थिति इतनी गंभीर है कि उसे एक IIT से दूसरे IIT में ट्रांसफर किया जाए।
इस पर स्टूडेंट की ओर से कहा गया कि अदालत के समक्ष प्रस्तुत अन्य मेडिकल डॉक्यूमेंट स्पष्ट करते हैं कि उसका उपचार लगातार जारी है और नियमित दवाओं की आवश्यकता है।
इसके बाद पीठ ने IIT रुड़की को स्टूडेंट को एडमिशन देने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि ट्रांसफर की स्थिति में स्टूडेंट को बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर कोर्स के प्रथम वर्ष से पढ़ाई शुरू करनी होगी, क्योंकि IIT खड़गपुर में किया जा रहा पाठ्यक्रम अलग है और उसे सीधे आगे जारी नहीं रखा जा सकता।
IIT रुड़की ने अदालत से अनुरोध किया कि इस आदेश को भविष्य के मामलों में मिसाल न माना जाए। स्टूडेंट की ओर से बताया गया कि वह अपने इलाज को देखते हुए प्रथम वर्ष से पढ़ाई शुरू करने के लिए तैयार है।
खंडपीठ ने कहा,
"न्याय के हित में यह उचित होगा कि स्टूडेंट को आवश्यक ट्रांसफर और प्रवासन प्रमाणपत्र जारी किए जाएं, ताकि वह IIT रुड़की में एडमिशन ले सके।"
सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश स्टूडेंट की विशेष स्वास्थ्य परिस्थितियों और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए पारित किया गया कि उसका इलाज चंडीगढ़ में चल रहा है, जबकि वह खड़गपुर में अध्ययन कर रहा था।
साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि IIT रुड़की में एमडिशन के बाद स्टूडेंट को संस्थान की शुल्क संरचना और अन्य सभी नियमों का पालन करना होगा।
याचिका में स्टूडेंट ने सुप्रीम कोर्ट के सुकदेब साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें अदालत ने कहा था कि मानसिक स्वास्थ्य, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।


