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सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद मुठभेड़ की जांच के लिए आयोग को 6 महीने का समय और दिया

LiveLaw News Network
30 Jan 2021 5:35 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद मुठभेड़ की जांच के लिए आयोग को 6 महीने का समय और दिया
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सुप्रीम कोर्ट की बेंच जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम ने हैदराबाद में 6 दिसंबर, 2019 को पशु चिकित्सक से बलात्कार करने के चार अभियुक्तों की कथित मुठभेड़ की जांच और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जांच आयोग को छह महीने का समय और दे दिया।

यह दूसरा अवसर है जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए आयोग को छह महीने का समय दिया है।

इससे पहले जुलाई 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद में 6 दिसंबर, 2019 को चार अभियुक्तों की कथित मुठभेड़ की जांच की अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 6 महीने की अवधि बढ़ाने के लिए प्रार्थना करने वाले जांच आयोग द्वारा दायर आवेदन को अनुमति दे दी है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता के परमेश्वर की याचिकाओं पर सुनवाई की थी और 6 महीने की मोहलत दी थी।

तदनुसार, बेंच ने जांच पूरी करने और अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए जांच आयोग को छह महीने का विस्तार दिया।

एडवोकेट के परमेस्वर द्वारा दायर की गई अर्जी में कहा गया था कि COVID ​​-19 महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन के कारण जो परिस्थितियां पैदा हुई हैं।

उन्होंने कहा,

"जांच आयोग की बैठकों को बाधित कर दिया है क्योंकि आयोग के तीन सदस्य विभिन्न शहरों में रहते हैं और जांच का स्थान पूरी तरह से अलग शहर में है।"

हालांकि, आवेदन में कहा गया कि जांच आयोग का काम रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों के संग्रह के साथ-साथ महामारी से पूरी तरह से रुका नहीं है, साथ ही स्थिति के बावजूद घटना से परिचित व्यक्तियों के बयान भी लिए गए।

12 दिसंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर, 2019 को हैदराबाद में चार आरोपी व्यक्तियों के कथित एनकाउंटर का कारण बनने वाली परिस्थितियों की जांच के लिए एक जांच आयोग के गठन का निर्देश दिया था। चारों आरोपी व्यक्ति एक युवा पशु चिकित्सक के बलात्कार और हत्या के मामले में पुलिस हिरासत में थे।

आयोग का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति वीएस सिरपुरकर कर रहे हैं और इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरपी सोंदुरबाल्डोटा और केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक डीआर कार्तिकेयन शामिल हैं। पहले जांच पूरी करने के लिए आयोग को 6 महीने की अवधि दी गई थी।

तदनुसार, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने जांच आयोग के लिए आवास की अनुमति दी थी, और तेलंगाना सरकार ने आयोग के कामकाज में सहायता करने के लिए छह महीने की अवधि के लिए 19 अस्थायी पदों के निर्माण के लिए स्वीकृति जारी की थी।

इसके बाद, जांच आयोग के संदर्भ की शर्तें 10 जनवरी, 2020 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित की गईं, और,

"उन परिस्थितियों की जांच के लिए निर्देशित किया गया, जो उपर्युक्त चार व्यक्तियों की मृत्यु और इस बात का पता लगाने के लिए थी कि क्या ये मौतें एक अपराध के तहत प्रकट होती है। यदि हां, तो अधिकारियों को दोषी ठहराने की जिम्मेदारी तय करें।"

इसके बाद, 3 फरवरी 2020 को जांच आयोग की पहली बैठक आयोजित की गई थी और एक सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित किया गया था, जिसमें जांच के मामले से परिचित व्यक्तियों को आमंत्रित किया गया था, ताकि वो आयोग के सामने आ सके और जानकारी प्रस्तुत कर सके।

आवेदन में कहा गया था कि सार्वजनिक नोटिस के अनुपालन में, 1365 शपथ पत्र विभिन्न व्यक्तियों द्वारा दायर किए गए थे, और लगभग सभी तेलुगू में थे, इसलिए, अंग्रेजी में अनुवाद की आवश्यकता है। आगे प्रस्तुत किया गया है कि NHRC जांच दल, एसआईटी जांच टीम से प्रासंगिक रिकॉर्ड के साथ-साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी एकत्र की गई है।

आवेदन में कहा गया था कि COVID-19 महामारी के मद्देनज़र राष्ट्रीय तालाबंदी की घोषणा के कारण, जांच आयोग का काम रोक दिया गया है क्योंकि वो बैठक निलंबित करने के लिए विवश हो गए हैं। ऑनलाइन सुनवाई और बैठकें आयोजित करने की संभावना का पता लगाया गया था, लेकिन सुरक्षा और गोपनीयता से उत्पन्न कठिनाइयों के कारण आयोग द्वारा इसे छोड़ दिया गया था।

"इसके अलावा, जांच के लिए घटना स्थल और अन्य संबंधित स्थानों का शारीरिक निरीक्षण आवश्यक है, जो कि आभासी अवलोकन में भी संभव नहीं है। जांच का संचालन,और स्पॉट निरीक्षण और सुनवाई वर्चुअल तरीके से संभव नहीं है।"

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