हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज पर हमले के बाद लापता भारतीय कप्तान को खोजने की मांग, पत्नी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

Amir Ahmad

4 Aug 2026 1:31 PM IST

  • हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज पर हमले के बाद लापता भारतीय कप्तान को खोजने की मांग, पत्नी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

    हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में मार्च 2026 में एक व्यापारी जहाज पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद लापता हुए भारतीय मर्चेंट नेवी कप्तान आशीष कुमार की पत्नी ने उनके जीवित होने का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि कप्तान आशीष कुमार विदेशी तत्वों की अवैध हिरासत में हैं और केंद्र सरकार को उन्हें खोजकर सुरक्षित वापस लाने के लिए सभी राजनयिक, वाणिज्य दूतावास और खुफिया माध्यमों का उपयोग करने का निर्देश दिया जाए।

    याचिकाकर्ता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को कप्तान आशीष कुमार का पता लगाकर उन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश देने की मांग की।

    याचिका के अनुसार 1 मार्च 2026 को व्यापारी जहाज एम.टी. स्काईलाइट ओमान के खासाब बंदरगाह के पास लंगर डाले हुए था। उसी दौरान अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच क्षेत्रीय तनाव के बीच जहाज पर कथित रूप से मिसाइल और ड्रोन से हमला हुआ। जहाज पर सवार 20 चालक दल के सदस्यों में से 18 को बचा लिया गया, जबकि कप्तान आशीष कुमार और एक अन्य भारतीय नागरिक लापता हो गए।

    याचिका में कहा गया कि प्रारंभ में भारतीय अधिकारियों ने कप्तान के केबिन से मिले जले हुए अस्थि अवशेषों के आधार पर उन्हें मृत मान लिया था। हालांकि बाद में उनके छोटे भाई के DNA सैंपल से किए गए परीक्षण में उन अवशेषों का मिलान नहीं हुआ।

    याचिका के मुताबिक 15 मई 2026 को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने परिवार को सूचित किया कि बरामद अवशेष कप्तान आशीष कुमार के नहीं हैं।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे उनके मृत होने की पहले की धारणा पूरी तरह गलत साबित हो गई।

    याचिका में ओमान की शाही पुलिस के खोज एवं आपराधिक जांच महानिदेशालय की जैविक तकनीकी जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया। इसमें कथित तौर पर कहा गया कि जांच किए गए अस्थि अवशेषों से किसी भी मानव DNA की पुष्टि नहीं हुई।

    याचिकाकर्ता ने दावा किया कि हमले के बाद भी कप्तान आशीष कुमार जीवित होने के संकेत मिले थे। याचिका के अनुसार, घटना वाले दिन उनके दूसरे मोबाइल फोन पर भेजा गया एक व्हाट्सऐप संदेश जहाज पर हमले के तीन घंटे से अधिक समय बाद सफलतापूर्वक पहुंचा, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह मोबाइल उस समय सक्रिय था।

    याचिका में यह भी कहा गया कि 4 मार्च 2026 को याचिकाकर्ता को देश और विदेश के विभिन्न नंबरों से फोन आए, जिनमें कप्तान आशीष कुमार की रिहाई के बदले 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई और दावा किया गया कि वह उनके कब्जे में हैं।

    इसके अलावा याचिका में कहा गया कि कप्तान के मुख्य आईफोन से जुड़े व्हाट्सऐप प्रोफाइल को 31 मार्च 2026 को मैन्युअल रूप से हटा दिया गया।

    याचिकाकर्ता का तर्क है कि व्हाट्सऐप सामान्यतः 120 दिन की निष्क्रियता के बाद स्वतः प्रोफाइल हटाता है, जबकि यहां घटना के केवल 30 दिन बाद प्रोफाइल हटना इस बात का संकेत है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने फोन का उपयोग किया।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि उस नंबर पर कॉल करने पर कई बार कॉल ऑन होल्ड का संदेश सुनाई देता था।

    याचिकाकर्ता का आरोप है कि विदेश मंत्रालय, मस्कट स्थित भारतीय दूतावास, नौवहन महानिदेशालय तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को कई ईमेल, कानूनी नोटिस और अभ्यावेदन भेजे जाने के बावजूद अब तक कोई विशेष अंतरराष्ट्रीय जांच शुरू नहीं की गई।

    याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा कप्तान आशीष कुमार का पता लगाने में विफल रहना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से जहाज के वॉयेज डेटा रिकॉर्डर, घटना से पहले के संचार रिकॉर्ड, मोबाइल ट्रैकिंग रिकॉर्ड तथा कप्तान के मोबाइल फोन के IMEI लोकेशन संबंधी आंकड़ों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश देने की मांग की।

    साथ ही विदेश मंत्रालय को ओमान सरकार और संबंधित अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरणों के साथ उच्चस्तरीय राजनयिक पहल करने का निर्देश देने की भी प्रार्थना की गई ताकि DNA रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कप्तान आशीष कुमार का पता लगाया जा सके।

    गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यूक्रेन के निकट काला सागर में ड्रोन हमले के बाद लापता हुए एक भारतीय नाविक का पता लगाने के लिए भी विदेश मंत्रालय को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया था।

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