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हर्ष मंदर मामला : ' हमें इस कार्रवाई में आपकी जरूरत नहीं है' : मुख्य न्यायाधीश ने कॉलिन गोंजाल्विस से कहा

LiveLaw News Network
5 March 2020 8:20 AM GMT
हर्ष मंदर मामला :  हमें इस कार्रवाई में आपकी जरूरत नहीं है : मुख्य न्यायाधीश ने कॉलिन गोंजाल्विस से कहा
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दंगा पीड़ितों की ओर से वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस को सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की उस याचिका में हस्तक्षेप करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया जिसमें हेट स्पीच के जरिए नफरत फैलाने वाले नेताओं के खिलाफ पुलिस जांच की मांग की गई है जो कथित रूप से दिल्ली में हुए दंगों की वजह बने।

गोंजाल्विस ने मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे से मामले में हस्तक्षेप की अनुमति देने का अनुरोध किया, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है।

"हमें इस कार्यवाही में आपकी आवश्यकता नहीं है, " मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने गोंजाल्विस को बताया।

दरअसल बुधवार को कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा लगाए गए उन आरोपों पर मंदर की प्रतिक्रिया मांगी थी कि उन्होंने CAA के विरोध प्रदर्शन के दौरान न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पारित की थी। गुरुवार को गोंजाल्विस ने मंदर के पूर्ण भाषण के रिकॉर्ड को रखने की मांग की लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें बताया कि सॉलिसिटर जनरल ने पहले ही ऐसा कर दिया है।

"सॉलिसिटर जनरल ने पहले ही ऐसा कर दिया है। आप इन कार्यवाहियों का हिस्सा नहीं हैं। कृपया आप इससे बाहर रहें। आपको इन कार्यवाहियों से कोई लेना-देना नहीं है," मुख्य न्यायाधीश ने गोंजाल्विस से कहा।

गौरतलब है कि मंदर ने दिल्ली हाईकोर्ट के 27 फरवरी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसमें हाईकोर्ट ने उनकी जनहित याचिका की सुनवाई स्थगित कर दी थी। याचिका में भाजपा के नेता अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा, अभय वर्मा और कपिल मिश्रा के खिलाफ हेट स्पीच के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।

बुधवार को मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष इस याचिका को नौ दंगा पीड़ितों द्वारा दायर एक अन्य रिट याचिका के साथ सूचीबद्ध किया गया था।

हालांकि पीठ ने दंगा पीड़ितों की याचिका को उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करके और शुक्रवार को इसे सूचीबद्ध करने के लिए कहा था जबकि SG तुषार मेहता ने यह दावा किया कि मंदर ने संस्थान के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

"अगर आप सुप्रीम कोर्ट के बारे में यह महसूस करते हैं, तो हमें तय करना होगा कि आपके साथ क्या करना है, " मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने मंदर के खिलाफ आरोप पर कहा था।

बुधवार को दिल्ली पुलिस द्वारा एक हलफनामा दायर किया गया था जिसमें कहा गया था कि मंदर का भाषण "हिंसा भड़काने वाला" था और "गंभीर रूप से अवमानना" का मामला है।

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