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शादी करने का वादा करके पीछे हटने पर नहीं बल्कि कर्ज चुकाने में नाकाम रहने पर आईपीसी की धारा 420 आकर्षित होगी : फिल्म निर्देशक की याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
4 May 2022 1:26 PM GMT
शादी करने का वादा करके पीछे हटने पर नहीं बल्कि कर्ज चुकाने में नाकाम रहने पर आईपीसी की धारा 420 आकर्षित होगी : फिल्म निर्देशक की याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने फिल्म निर्देशक स्टेनली जोसेफ के खिलाफ एक महिला द्वारा दायर धोखाधड़ी के मामले में कहा है कि हालांकि शादी करने के वादे से पीछे हटना इस मामले में धोखाधड़ी नहीं होगी, लेकिन कर्ज़ लेकर उसे अदा नहीं करना धोखाधड़ी का आपराधिक इरादा, आईपीसी की धारा 420 को आकर्षित करेगा।

जस्टिस के नटराजन की एकल पीठ ने शाजिया असरा की शिकायत के आधार पर आईपीसी की धारा 420, धारा 23, 417 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली फिल्म निदेशक की याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने कहा,

" बेशक, शादी करने के वादे से पीछे हटना और धोखाधड़ी से आईपीसी की धारा 420 आकर्षित नहीं होगी, लेकिन कर्ज़ लेकर उसे नहीं चुकाना, आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी करने का आपराधिक इरादा माना जाएगा। इसलिए याचिकाकर्ता को जांच अधिकारी के समक्ष जांच से गुजरना आवश्यक है। "

यह आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता पेशे से एक फिल्म निर्देशक है और शिकायतकर्ता उससे परिचित थी और उसके प्रति आकर्षित हुई थी। इसके बाद वे 2015 और 2016 के बीच एक साथ रहे और बाद में याचिकाकर्ता ऑस्ट्रेलिया चला गया और लौटने के बाद उनके बीच कुछ झड़प हुई और केसीजनरल अस्पताल में एमएलसी मारपीट का मामला दर्ज किया गया। इसके बाद याचिकर्ता लापता हो गया।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसने उससे 9.50 लाख रुपये उधार लिए और केवल 2 लाख रुपये लौटाए और उसने उसे वापस करने का भी वादा किया, लेकिन वापस नहीं किया और उससे शादी भी नहीं की।

महिला ने आरोप लगाया कि याचिकर्ता ने अभद्र भाषा का प्रयोग कर उसके साथ बदसलूकी की। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस के समक्ष 15.12.2017 को दी गई सूचना प्रथम सूचना नहीं है। अपनी शिकायत के अनुसार उसने 18.11.2017 को ही शिकायत कर दी थी और एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) का मामला दर्ज किया गया था, इसलिए, यह प्राथमिक जानकारी नहीं है।

इसके अलावा यह तर्क दिया गया था कि यदि याचिकाकर्ता के बारे में कहा जाता है कि उसने उसके साथ मारपीट की है तो आईपीसी की धारा 420 के तहत अपराध का गठन करने के लिए कोई सामग्री नहीं बनाई गई है। इसके अलावा, यह तर्क दिया गया था कि दोनों पक्ष विवाहित हैं, शिकायतकर्ता का बच्चा भी बड़ा है और एक दूसरे से शादी करने का सवाल ही नहीं उठता।

अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस ने आंशिक रूप से मामले की जांच की, जहां उन्होंने यशवंतपुर में दोनों एक साथ रहने के साक्ष्य के रूप में किराये की रसीदें एकत्र कीं। बयान भी दर्ज किए, 7.50 लाख रुपये ट्रांसफर करने का चालान भी पुलिस ने बरामद किया है. इसलिए इस मामले में आगे की जांच की आवश्यकता है।

पीठ ने डिटेल देखने के बाद कहा,

" इस न्यायालय के समक्ष यह दिखाने के लिए कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया है कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई पहली सूचना, दूसरी सूचना है जो कानून के तहत अनुमेय नहीं है। "

इसमें कहा गया कि

" इसलिए केवल उसने अपनी शिकायत में कहा है कि केसीजनरल अस्पताल में एमएलसी का मामला दर्ज किया गया था, खुद यह कहने का आधार नहीं हो सकता कि प्रतिवादी नंबर 2 की शिकायत पर याचिकाकर्ता के खिलाफ मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है। एमएलसी मारपीट का मामला अपने आप में यह कहने का आधार नहीं है कि आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। "

इसमें कहा गया है कि अदालत मामले की जांच में नहीं जा सकती है और इसलिए पुलिस द्वारा मामले की जांच की जानी चाहिए।

केस टाइटल: स्टेनली जोसेफ बनाम स्टेट

केस नंबर: आपराधिक याचिका नंबर 1172/2018

साइटेशन: 2022 लाइव लॉ (कर) 147

आदेश की तिथि: 18 अप्रैल, 2022

उपस्थिति: याचिकाकर्ता के लिए एडवोकेट केएन प्रवीण कुमार; R1 . के लिए एडवोकेट महेश शेट्टी

आदेश पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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