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[सीपीसी की धारा 25] ट्रांसफर पिटीशन का निर्णय करते वक्त 'पहले मुकदमा करने वाले को प्राथमिकता' का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
20 Jun 2020 2:07 PM GMT
[सीपीसी की धारा 25] ट्रांसफर पिटीशन का निर्णय करते वक्त पहले मुकदमा करने वाले को प्राथमिकता का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
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“सीपीसी की धारा 25 के तहत याचिका के स्थानांतरण का निर्णय सभी पक्षों को न्याय को ध्यान में रखकर किया जाता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 25 के तहत स्थानांतरण याचिका पर विचार करते वक्त 'पहले अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले को प्राथमिकता देने' के सिद्धांत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने कहा कि ऐसी याचिकाओं का निर्धारण सभी पक्षों को न्याय को ध्यान में रखकर किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट बंटवारे और अन्य राहतों से संबंधित दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले को स्थानांतरित करने की अर्जी पर विचार कर रहा था। यह दलील दी गयी थी कि बंटवारे के मुकदमे को बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष लंबित वसीयत संबंधी मुकदमे के साथ सम्बद्ध किया जाये।

इस याचिका का प्रतिवादियों ने यह कहते हुए विरोध किया था कि बंटवारे से संबंधित मुकदमा वसीयत संबंधी याचिका से पहले शुरू हुई थी, इसलिए इसकी सुनवाई जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए और यदि जरूरत हो तो वसीयत याचिका का स्थानांतरण दिल्ली हाईकोर्ट किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति बोस ने कहा :

"संहिता की धारा 25 के तहत स्थानांतरण याचिका का निर्धारण सभी पक्षों को न्याय दिलाने को ध्यान में रखकर किया जाता है। पहले मुकदमा करने वाले को प्राथमिकता देने का सिद्धांत इस तरह के मुकदमों पर लागू नहीं हो सकता।"

स्थानांतरण याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि चूंकि प्रोबेट (मृत लेख प्रमाण) या लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (प्रबंध पत्र) को मंजूरी का निर्धारण प्रोबेट कोर्ट का अधिकार है, इसलिए सभी पक्षों के न्याय के हित में यह जरूरी है कि वसीयत संबंधी याचिका की सुनवाई कर रहे बॉम्बे हाईकोर्ट ही बंटवारे संबंधी मुकदमे पर भी फैसला करे।

केस नं. : स्थानांतरण याचिका (सिविल) नं. 1531/2018

केस का नाम : शमिता सिंह बनाम रश्मि अहलुवालिया

कोरम : न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस

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